दिवाली पर आज बन रहे हैं कई दुर्लभ शुभ संयोग! मां लक्ष्मी की कृपा पाने का सुनहरा मौका...जानें शुभ मुहूर्त, विधि और खास उपाय

आज देशभर में दीपों का महापर्व दिवाली श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस बार दिवाली पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिन्हें सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है. मान्यता है कि दिवाली की रात विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से घर में धन, वैभव और सुख-शांति का आगमन होता है. इस अवसर पर श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना कर दीप जलाते हैं. आइए जानते हैं लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के खास उपाय.
 

Diwali 2026:  देशभर में आज, रविवार 8 नवंबर को दीपावली का पर्व श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाले इस त्योहार का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। प्रभु श्रीराम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से रोशन कर दिया था। तभी से दीप जलाकर दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है।

दीपावली के दिन धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और खुशहाली आती है।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ स्थिर लग्न भी रहेगा, जिसे गृहस्थों के लिए लक्ष्मी पूजन का विशेष शुभ समय माना जाता है।

पूजा के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक

  • प्रदोष काल: शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक

  • वृषभ काल: शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक

  • निशिता काल: रात 11:39 से 12:31 बजे तक

  • सिंह लग्न: रात 12:25 से 2:42 बजे तक

गृहस्थों के लिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है। वहीं निशिता काल में विशेष तांत्रिक साधना और काली पूजा का महत्व है।

इस विधि से करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा

दिवाली की शाम सबसे पहले घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद घर को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं। पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

सबसे पहले पूजा का संकल्प लें और भगवान गणेश को तिलक लगाकर फूल, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को लाल फूल, कमल, फल, खील, बताशे और मिठाई चढ़ाएं। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें।

इसके बाद विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। अंत में दोनों देवी-देवताओं की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी सामग्री

दिवाली की पूजा के लिए पहले से पूजन सामग्री तैयार रखना जरूरी है। इसमें चौकी, लाल या पीला कपड़ा, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, कलश, जल, गंगाजल, आम के पत्ते, नारियल, कलावा, देसी घी, तेल के दीपक, अक्षत, रोली, हल्दी, चंदन, अबीर, गुलाल, दूर्वा, फूल-माला, खीर, बताशे, मिठाई, खील, कमलगट्टा, फल, सोने-चांदी के सिक्के, रुपये और कौड़ियां शामिल हैं।

दिवाली पर दीप जलाने का क्या है धार्मिक महत्व?

दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की खुशी में दीप जलाने की परंपरा आज भी पूरे देश में निभाई जाती है।

इस दिन लोग अपने घरों में दीप जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और परिवार के साथ मिलकर मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। मान्यता है कि दीपावली की रात स्वच्छ और रोशनी से सजे घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

कब से कब तक रहेगी अमावस्या तिथि?

द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह करीब 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण इसी दिन दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है।