मिडिल ईस्ट तनाव से हिला तेल बाज़ार: कच्चा तेल 120 डॉलर के करीब, दुनिया पर मंडराया नए ‘ऑयल क्राइसिस’ का खतरा

    •    होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा दबाव, वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा
    •    भारत, चीन और जापान जैसे देशों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
 
Newshaat Desk: दुनिया की राजनीति और युद्ध जैसे हालात का असर अब सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, यूनाइटेड स्टेटस और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को झकझोर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ ही दिनों में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति आगे और गंभीर हो सकती है और यह संकट इतिहास के बड़े तेल संकटों में से एक बन सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़

इस पूरे संकट का केंद्र है Strait of Hormuz। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग माना जाता है।

U.S. Energy Information Administration के अनुसार हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है, जो दुनिया की कुल तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत है।

लेकिन मौजूदा सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री रास्ते से तेल की आवाजाही पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर

इस संकट का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर हैं। इसमें इंडिया, चाइना, जापान और साउथ कोरिया जैसे बड़े एशियाई देश शामिल हैं।

दरअसल, होर्मुज से गुजरने वाले तेल का लगभग आधा हिस्सा इन्हीं देशों द्वारा खरीदा जाता है। ऐसे में यदि यह मार्ग प्रभावित होता है तो इन देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।

1973 के तेल संकट से भी बड़ा खतरा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Strait of Hormuz पूरी तरह बंद हो जाता है तो दुनिया को 1973 Oil Crisis से भी बड़ा झटका लग सकता है। उस समय दुनिया की तेल खपत आज के मुकाबले काफी कम थी, जबकि अब वैश्विक मांग कई गुना बढ़ चुकी है।

उद्योग और व्यापार पर भी असर

अगर तेल सप्लाई बाधित होती है तो इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। गैस, पेट्रोकेमिकल और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। इससे वैश्विक उद्योग, परिवहन और व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

इंडिया अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत तेल आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर इसी सवाल पर टिकी है- क्या Strait of Hormuz खुला रहेगा, या फिर बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए आर्थिक तूफान की ओर धकेल देगा।