UP Politics में नई एंट्री! पूर्व IAS दिव्या मित्तल की नई पार्टी ‘जननीति भारत’, जानिए 3 बड़े वचन...

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने ‘जननीति भारत’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि पार्टी आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देने और राजनीति में जनता की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से काम करेगी.

 

Uttar Pradesh:  उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा हुई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने ‘जननीति भारत’ नाम से राजनीतिक दल बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी। पार्टी का मुख्य उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को राजनीति के केंद्र में लाना और नीतियों के निर्माण से लेकर सरकारी योजनाओं की निगरानी तक जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

दिव्या मित्तल ने पार्टी की कार्यप्रणाली के लिए तीन प्रमुख वचन रखे हैं। इनमें जनता की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाना, वास्तविक जरूरत के आधार पर फैसले लेना और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।

जनता के संदेशों से मिली पार्टी बनाने की प्रेरणा

मेरा राजनीतिक सफर का अगला कदम। मेरे साथ जुड़ें 🙏🙏 https://t.co/c9ihA3dxOB

— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) October 15, 2026


दिव्या मित्तल ने बताया कि राजनीति में आने की इच्छा जाहिर करने के बाद उन्हें व्हाट्सऐप पर बड़ी संख्या में लोगों के संदेश मिले। उनके अनुसार, संदेशों की संख्या इतनी अधिक थी कि उनका नंबर ही बंद हो गया। उन्होंने इसके लिए लोगों से माफी मांगते हुए कहा कि जनता के समर्थन और प्रतिक्रियाओं ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, लेकिन आम नागरिकों की समस्याओं और जरूरतों को पर्याप्त महत्व दिए जाने की आवश्यकता है। ‘जननीति भारत’ के माध्यम से वह ऐसी व्यवस्था बनाने की बात कर रही हैं, जिसमें हर व्यक्ति की आवाज सुनी जाए और फैसलों में उसकी भागीदारी हो।

पहला वचन: जनता की जरूरतों से तय होंगी नीतियां

दिव्या मित्तल के मुताबिक, सरकारी नीतियां बनाते समय उन लोगों के अनुभवों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिन पर उनका सीधा असर पड़ता है। किसानों की समस्याओं को समझने के लिए खेती से जुड़े लोगों की राय, छोटे व्यापारियों की दिक्कतों को जानने के लिए उनकी भागीदारी और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने की जरूरत है।

उन्होंने गरीब परिवारों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि आम लोगों की जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों में देरी क्यों होती है। उनका कहना है कि नीतियां बनाते समय वर्तमान जरूरतों के साथ आने वाली पीढ़ियों के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

दूसरा वचन: जाति-धर्म नहीं, जरूरत होगी फैसलों का आधार

पार्टी का दूसरा वचन जरूरत के आधार पर निर्णय लेने का है। दिव्या मित्तल ने कहा कि विकास योजनाओं में जाति, धर्म या किसी व्यक्ति के प्रभाव के बजाय वास्तविक जरूरतों को महत्व मिलना चाहिए।

उन्होंने सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास कार्यों की योजना बनाते समय उससे प्रभावित होने वाले सभी लोगों की राय लेना जरूरी है। इससे किसी एक प्रभावशाली व्यक्ति की मांग के कारण दूसरे परिवारों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐप आधारित व्यवस्था का प्रस्ताव

दिव्या मित्तल ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए तकनीक के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। उनके प्रस्ताव के अनुसार, महिलाएं मोबाइल ऐप के माध्यम से उन स्थानों को चिह्नित कर सकेंगी, जहां उन्हें आने-जाने में असुरक्षा महसूस होती है।

यदि किसी स्थान पर बड़ी संख्या में शिकायतें या निशान दर्ज होते हैं, तो वहां स्ट्रीट लाइट, पुलिस गश्त और सीसीटीवी कैमरों जैसी सुविधाओं की जरूरत का आकलन किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा संबंधी फैसलों में महिलाओं के वास्तविक अनुभवों को शामिल किया जाना चाहिए।

तीसरा वचन: सरकारी कामकाज का हिसाब देगी व्यवस्था

जननीति भारत का तीसरा वचन सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है। दिव्या मित्तल के अनुसार, नागरिकों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके गांव या मोहल्ले में कौन-सा विकास कार्य चल रहा है, उस पर कितना खर्च हो रहा है और उसे पूरा करने की समयसीमा क्या है।

उन्होंने सरकारी आवास योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि लाभार्थियों को मंजूरी और योजना की स्थिति की जानकारी सीधे मोबाइल पर मिलनी चाहिए। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

स्कूल-अस्पताल से सड़क तक, जनता करेगी समीक्षा

दिव्या मित्तल ने सरकारी सेवाओं की निगरानी के लिए तीन रंगों पर आधारित व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसमें हरा रंग अच्छे काम, पीला रंग अधूरे काम और लाल रंग खराब काम को दर्शाएगा।

इस व्यवस्था के तहत जनता स्कूलों, अस्पतालों, राशन दुकानों और सड़कों की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकेगी। पार्टी की ओर से प्रस्तावित इस मॉडल का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां सरकारी सेवाओं में सुधार की जरूरत है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए इसकी कार्यप्रणाली, सत्यापन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट करना होगा।

विधायकों की जिम्मेदारी भी होगी अलग

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी में विधायकों की भूमिका जनता की शिकायतों को सरकार तक पहुंचाने के साथ-साथ उन लोगों की मदद करने की भी होगी, जो लिखित शिकायत दर्ज नहीं करा सकते या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाते।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल चुनाव के दिन मतदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता को पूरे कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं की निगरानी करने, समस्याएं उठाने और जवाब मांगने का अवसर मिलना चाहिए।

घर-घर जाकर समर्थन जुटाने की तैयारी

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी के पास बड़े प्रचार अभियानों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसलिए वह घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करने और स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने लोगों से अपने गांवों और कस्बों में बुलाने तथा पार्टी के विचारों को दूसरों तक पहुंचाने की अपील की।

अब ‘जननीति भारत’ के सामने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संगठन खड़ा करने, जनता तक अपने प्रस्ताव पहुंचाने और उन्हें प्रभावी राजनीतिक कार्यक्रम में बदलने की चुनौती होगी। पार्टी को चुनाव में कितना समर्थन मिलता है, यह आने वाले समय में उसके जनसंपर्क और संगठनात्मक तैयारियों से स्पष्ट होगा।