कोरोना के बाद नई स्वास्थ्य चुनौती! क्या है “White Plague” और क्यों बढ़ रहे मामले..समय पर जांच नहीं तो खतरा बड़ा...
Aware Of White Plague: COVID-19 महामारी के बाद जहां दुनिया धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रही है, वहीं अब एक पुरानी लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी “White Plague” एक बार फिर चिंता का कारण बनती जा रही है. कई राज्यों में इसके संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है.
क्या है “White Plague”?
White Plague दरअसल Tuberculosis (टीबी) का ही पुराना नाम है. पहले के समय में टीबी के मरीज अत्यधिक दुबले-पतले और कमजोर हो जाते थे, जिससे उनके शरीर का रंग पीला-सफेद पड़ जाता था। इसी कारण इसे White Plague कहा जाने लगा.
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों—जैसे हड्डियां, दिमाग, किडनी और आंत को भी नुकसान पहुंचा सकती है.
COVID-19 के बाद क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, COVID-19 के बाद टीबी के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं:
- कमजोर इम्युनिटी: कोरोना से उबर चुके कई लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई
- लॉकडाउन के दौरान जांच में कमी: समय पर टीबी की पहचान नहीं हो पाई
- इलाज में बाधा: कई मरीजों ने इलाज बीच में ही छोड़ दिया
- पोषण की कमी और तनाव: महामारी के बाद आर्थिक व मानसिक दबाव बढ़ा
इन कारणों से छिपे हुए (Latent) टीबी केस अब सक्रिय रूप में सामने आ रहे हैं.
कैसे फैलती है यह बीमारी?
टीबी मुख्य रूप से
- खांसने
- छींकने
- थूकने
के जरिए हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से होती है। भीड़भाड़ वाले और बंद स्थानों में इसके फैलने का खतरा अधिक होता है.
टीबी के प्रमुख लक्षण
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी
- खांसी में खून आना
- बुखार और रात में पसीना
- तेजी से वजन घटना
- लगातार थकान और कमजोरी
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर साबित हो सकता है.
कैसे फैलती है White Plague?
- खांसी और छींक के जरिए
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से
- बंद और भीड़भाड़ वाले स्थानों में तेजी से फैलाव
इलाज संभव, लेकिन लापरवाही खतरनाक
क्या इसका इलाज संभव है?
हां, डॉक्टरों के अनुसार टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन:
- समय पर जांच
- पूरा इलाज
- दवाएं बीच में न छोड़ना
बेहद जरूरी है। लापरवाही से ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ सकता है
डॉक्टरों का कहना है कि टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते मरीज पूरा इलाज समय पर और नियमित रूप से करे. इलाज अधूरा छोड़ने से ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ जाता है, जो और भी जानलेवा हो सकती है.
सरकार और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की जांच और इलाज के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं. लोगों से अपील की जा रही है कि
- लक्षण दिखते ही जांच कराएं
- इलाज बीच में न छोड़ें
- मास्क और स्वच्छता का ध्यान रखें
क्यों जरूरी है सतर्कता?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो White Plague एक बार फिर बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है. COVID-19 ने पहले ही यह सिखा दिया है कि किसी भी बीमारी को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.