विज्ञान भवन में हिंदी की नई तस्वीर: राजेश राज बोले—अब अभिव्यक्ति नहीं, अवसर और रोजगार की भाषा बन चुकी है हिंदी

 

Patna Desk: राजधानी के विज्ञान भवन में 10 जनवरी 2026 को पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्रालय की संयुक्त हिंदी सलाहकार समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने की। इसका मुख्य उद्देश्य मंत्रालय और उससे जुड़े विभागों में राजभाषा हिंदी के अधिकतम और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना रहा।

बैठक में हिंदी सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, समिति के सदस्य और डीडी न्यूज़ दिल्ली के वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार राजेश राज, प्रख्यात साहित्यकार प्रो. श्रुति सिन्हा, डॉ. राजेंद्र मिलन सहित देशभर से आए कई प्रतिष्ठित सदस्य मौजूद रहे। राजभाषा विभाग की उपनिदेशक स्वाति मेल्टी ने बैठक का कुशल संचालन किया। वहीं केरल से आई मत्स्य पालन विभाग की अधिकारी रेशमी की सशक्त हिंदी प्रस्तुति बैठक का विशेष आकर्षण बनी।

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय कार्यों में हिंदी का प्रयोग औपचारिकता नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि हिंदी में काम करने से न केवल संवाद सरल होता है, बल्कि आम जनता से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि यदि आज़ादी के तुरंत बाद ही हिंदी में सरकारी कामकाज की परंपरा मजबूत हो गई होती, तो आज हिंदी पखवाड़ा जैसे अभियानों की जरूरत ही नहीं पड़ती। हिंदी को आत्मसात करना समय की मांग है।

बैठक में बोलते हुए समिति के सदस्य राजेश राज ने भावनात्मक और विचारोत्तेजक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि बेगूसराय से आते हैं और दिनकर की माटी में जन्म लेना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि समिति के अध्यक्ष ललन सिंह का मुंगेर और बेगूसराय से जुड़ाव इस मंच को और भी गौरवशाली बनाता है।

राजेश राज ने कहा कि ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रमों के रेडियो और दूरदर्शन पर आरंभ होने के बाद हिंदी का दायरा तेजी से बढ़ा है। आज हिंदी सिर्फ संवाद की भाषा नहीं रही, बल्कि रोजगार, शिक्षा और अवसरों की भाषा बन चुकी है। युवा वर्ग हिंदी में एमए, पीएचडी और नेट जैसी परीक्षाएं पास कर अकादमिक और शोध क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने हिंदी लेखन को नई ऊंचाई दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में संवाद करने से हिंदी को वैश्विक पहचान और सम्मान मिला है, जिससे देश के युवाओं में भाषा को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है।

बैठक में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग के सचिव, अपर सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर यह बैठक हिंदी को सिर्फ राजभाषा नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की कार्यभाषा बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में सामने आई।