धनतेरस पर सोना-चांदी नहीं, ये है सबसे बड़ा धन! भगवान धन्वंतरि का सेहत से जुड़ा खास संदेश

धनतेरस सिर्फ सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का पर्व नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन का संदेश देने वाला त्योहार भी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. उन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है. आयुर्वेदिक परंपरा में संतुलित खानपान, नियमित दिनचर्या, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को स्वस्थ रहने का आधार बताया गया.
 

Dhanteras Special 2026:  दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का आगाज धनतेरस से होता है। इस दिन लोग परंपरा के अनुसार सोना, चांदी, बर्तन और अन्य कीमती सामान खरीदकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन धनतेरस का महत्व केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में धन-दौलत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण अच्छा स्वास्थ्य है। निरोगी शरीर और स्वस्थ मन ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर आरोग्य, लंबी आयु और स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है।

सोना-चांदी खरीदने के साथ स्वास्थ्य का भी लें संकल्प

धनतेरस पर नई वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। हालांकि, इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि व्यक्ति अपनी सेहत को प्राथमिकता दे। धन और भौतिक सुख-सुविधाएं तभी उपयोगी हैं, जब शरीर स्वस्थ हो।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनियमित दिनचर्या, खानपान की गलत आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी कई बीमारियों को जन्म दे रही हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं तेजी से लोगों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में धनतेरस का आरोग्य संबंधी संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

आयुर्वेद बताता है स्वस्थ रहने का तरीका

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सी.एन. पांडे के अनुसार, भगवान धन्वंतरि से जुड़ी चिकित्सा परंपरा का प्रमुख उद्देश्य केवल बीमारियों का उपचार करना नहीं, बल्कि रोगों से बचाव और शरीर को स्वस्थ बनाए रखना भी है।

आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ को शरीर के तीन प्रमुख दोष माना गया है। इनके संतुलन के साथ नियमित दिनचर्या, ऋतु के अनुरूप खानपान, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को स्वस्थ रहने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन को भी इस चिकित्सा पद्धति में विशेष स्थान दिया गया है।

प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में भी धन्वंतरि का उल्लेख

सहजौली गांव के आचार्य पंडित मनोज चौबे बताते हैं कि भारतीय चिकित्सा परंपरा में भगवान धन्वंतरि का विशेष महत्व है। सुश्रुत संहिता में काशीराज दिवोदास का उल्लेख धन्वंतरि के रूप में मिलता है। महर्षि सुश्रुत ने उन्हें अपना गुरु मानकर शल्य चिकित्सा का ज्ञान प्राप्त किया था।

इसके अलावा चरक संहिता, काश्यप संहिता और धन्वंतरि निघंटु जैसे प्राचीन ग्रंथ भारतीय चिकित्सा और औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत को सामने रखते हैं। धन्वंतरि निघंटु में विभिन्न औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों से जुड़ी जानकारियां मिलती हैं।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही पर्व का असली संदेश

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ लोगों को अपनी सेहत के प्रति भी जागरूक होने की जरूरत है। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

दरअसल, धनतेरस हमें यह समझने का अवसर देता है कि असली संपन्नता केवल बैंक बैलेंस या कीमती धातुओं से नहीं मापी जाती। स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना जीवन की खुशियों का आनंद लेना मुश्किल है। इसलिए इस धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने के साथ निरोगी रहने का संकल्प लेना भी इस पर्व को सार्थक बना सकता है।