पंडवानी की अमर आवाज हुई खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताया गहरा शोक
Newshaat Desk: छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाने वाली महान लोकगायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं तीजन बाई ने रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय लोककला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
तीजन बाई के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि प्रख्यात पंडवानी गायिका के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला, सशक्त स्वर और समर्पण के बल पर भारतीय लोक संस्कृति को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों और प्रशंसकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार तीजन बाई 27 मई से रायपुर एम्स में भर्ती थीं और रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई को पंडवानी शैली की सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय कलाकारों में गिना जाता था। पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाओं को गायन, अभिनय और संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली प्रस्तुति और अभिनय शैली के दम पर उन्होंने इस लोककला को गांवों की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।
भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया था। इन पुरस्कारों ने उनके दशकों लंबे सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।
तीजन बाई के निधन के साथ भारतीय लोककला ने अपनी एक अनमोल धरोहर खो दी है। हालांकि उनकी आवाज, उनकी कला और भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का उनका अद्भुत योगदान हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।