PM मोदी का वीडियो हटाना पड़ा भारी! सरकार के अल्टीमेटम के बाद META ने मांगी माफी
Meta Apologizes for Removing PM Modi Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के विवाद के बाद मेटा (Meta) ने आधिकारिक तौर पर माफी मांग ली है. कंपनी के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के दौरान इस गलती के लिए खेद जताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाया जाना कंपनी की ओर से हुई एक त्रुटि थी और इसके लिए मेटा माफी मांगता है.
IT मंत्री अश्विनी वैष्णव से की मुलाकात
मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान के नेतृत्व में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की. इससे पहले टीम ने आईटी सचिव एस. कृष्णन के साथ भी बैठक कर विभिन्न डिजिटल और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. बैठक के दौरान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए.
कंटेंट मॉडरेशन में कमियां स्वीकार
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कुछ कमियों को स्वीकार किया. कंपनी ने माना कि बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़े कंटेंट और डीपफेक सामग्री की पहचान और रोकथाम में कुछ चूक हुई है.
इसके अलावा मेटा अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी मात्रा में धन खर्च किया गया था. हालांकि, इस संबंध में कंपनी ने विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की.
PM मोदी की पोस्ट हटाने पर उठा था विवाद
यह विवाद 23 जुलाई को सामने आया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी. उस पोस्ट में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था.
पोस्ट हटाए जाने के बाद इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने मेटा से जवाब तलब किया.
सरकार ने उठाए कई अहम सवाल
बैठक के दौरान केंद्र सरकार ने मेटा से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक, वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा, एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगा.
सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि किस उपयोगकर्ता को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, तो वह खुद को केवल एक निष्पक्ष "इंटरमीडियरी" नहीं कह सकता. सरकार का मानना है कि कंटेंट की पहुंच और प्राथमिकता तय करने वाले प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी उसी अनुपात में तय होनी चाहिए.
संसदीय समिति ने भी मांगी माफी
इस बीच संसद की एक स्थायी समिति ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की है. समिति ने कंपनी को भेजे पत्र में कहा कि यदि तीन दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वर्तमान में प्राप्त कुछ कानूनी सुरक्षा और छूट पर पुनर्विचार किया जा सकता है.
सरकार ने जताई राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक तकनीकी गलती तक सीमित नहीं है. सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट प्रबंधन, एल्गोरिदम की पारदर्शिता और वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा जैसे मुद्दे राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और कानून-व्यवस्था से भी जुड़े हैं. फिलहाल मेटा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है. अब सरकार कंपनी द्वारा किए जाने वाले सुधारों और भारतीय नियमों के अनुपालन पर नजर बनाए हुए है.