BRICS Summit की तैयारी तेज! 3 दिन बंद कोर्ट-दफ्तर, 22 जगह Traffic Diversion

BRICS SUMMIT 2026: BRICS समिट को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं. शहर के कई हिस्सों में पोस्टर-पेंटिंग्स और सजावट का काम चल रहा है. समिट के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं.
 

BRICS SUMMIT 2026: BRICS समिट को लेकर राजधानी दिल्ली में तैयारियां तेज हो गई हैं। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन से पहले दिल्ली को पोस्टर, पेंटिंग्स और रोशनी वाली सजावट से सजाया जा रहा है। राजधानी के कई हिस्से इन दिनों त्योहार जैसे नजर आ रहे हैं। समिट में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारियां की गई हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने VIP और विदेशी प्रतिनिधियों की आवाजाही के लिए विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया है।

22 डायवर्जन पॉइंट, 35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, VIP काफिलों की आवाजाही के दौरान 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। इसके अलावा 35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक को कुछ समय के लिए नियंत्रित या डायवर्ट किया जाएगा।

एडिशनल CP (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि VIP मोटरकेड गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोका भी जा सकता है। पुलिस का प्रयास है कि विदेशी प्रतिनिधियों की आवाजाही सुचारु रहे और आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

नौ होटलों से भारत मंडपम तक होगी कारकेड रिहर्सल

समिट में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए दिल्ली के नौ होटलों को चिन्हित किया गया है। इन होटलों से भारत मंडपम तक पहुंचने वाले रास्तों की पहचान कर ली गई है।

दिल्ली पुलिस इन रूट्स पर लगातार कारकेड रिहर्सल कर रही है। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों को सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के बारे में विस्तृत ब्रीफिंग दी जा रही है, ताकि समिट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

दिल्ली में तीन दिन अदालतों का कामकाज प्रभावित

BRICS समिट के मद्देनजर दिल्ली हाईकोर्ट और सभी जिला अदालतों में 11 सितंबर को अवकाश रहेगा। वहीं ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी छुट्टी रहेगी।

इस तरह दिल्ली की निचली अदालतों में 11, 12 और 13 सितंबर यानी शुक्रवार से रविवार तक लगातार तीन दिन कामकाज नहीं होगा।

11 सितंबर को बंद रहेंगे MCD और केंद्र सरकार के ऑफिस

समिट के चलते 11 सितंबर को MCD और केंद्र सरकार के सभी कार्यालय भी बंद रहेंगे। हालांकि अस्पताल, सफाई व्यवस्था और अन्य जरूरी आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

सरकार और प्रशासन की कोशिश है कि समिट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ राजधानी में आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित न हों।

NSG का 'कवच BRICS' ऑपरेशन, 100 कमांडो ने की ड्रिल

BRICS समिट की सुरक्षा के लिए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) भी पूरी तरह तैयार है। NSG ने 'कवच BRICS' नाम से सुरक्षा अभ्यास किया है।

मंगलवार को करीब 100 NSG कमांडो ने चार अलग-अलग स्थानों पर ड्रिल में हिस्सा लिया। अलग-अलग समय पर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित आतंकी खतरे की स्थिति में NSG, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना था।

सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरान आपात स्थिति में तेजी से संयुक्त कार्रवाई करने की तैयारियों को परखा।

BRICS Summit की आधिकारिक थीम क्या है?

इस साल BRICS समिट की आधिकारिक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सहयोग, तकनीक, स्थिरता और विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

BRIC से BRICS तक कैसे बढ़ा समूह?

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के BRIC समूह के रूप में हुई थी। इन देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक वर्ष 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी।

इसके बाद वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। वर्ष 2011 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE को पूर्ण सदस्य बनाया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना। इस तरह BRICS में अब 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इसके अलावा कई साझेदार देश भी समूह से जुड़े हुए हैं।

BRICS में अंतरिक्ष सहयोग पर भी हो सकती है बड़ी चर्चा

इस बार के BRICS शिखर सम्मेलन में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी अहम चर्चा होने की संभावना है। सदस्य देशों के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट नेटवर्क को मजबूत करने और BRICS Space Council के गठन जैसे प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की उम्मीद है।

BRICS के सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की शुरुआती बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा हो चुकी है। प्रस्ताव के तहत सदस्य देशों के मौजूदा भू-अवलोकन उपग्रहों और उनसे मिलने वाले डेटा को साझा करके एक बड़ा निगरानी नेटवर्क विकसित करने की योजना है।

इसका इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात, जंगल की आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग और राहत-बचाव कार्यों में किया जा सकता है।

भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए खुल सकता है नया बाजार

BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग बढ़ने से भारत के निजी स्पेस-टेक सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। भारतीय कंपनियां प्रक्षेपण सेवाओं, छोटे उपग्रह, सैटेलाइट इमेजरी, भू-अवलोकन, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस और कृषि मैपिंग जैसे क्षेत्रों में दूसरे सदस्य देशों के साथ साझेदारी कर सकती हैं।

यदि साझा डेटा नेटवर्क और BRICS Space Council जैसी पहल को आगे बढ़ाया जाता है, तो भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए BRICS देशों में तकनीक और सेवाओं का एक बड़ा नया बाजार खुल सकता है।

BRICS Summit 2026 पर एक नजर

  • तारीख: 12 और 13 सितंबर
  • स्थान: भारत मंडपम, नई दिल्ली
  • थीम: Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability
  • ट्रैफिक डायवर्जन: 22 प्रमुख पॉइंट
  • प्रभावित सड़कें: 35 से ज्यादा
  • प्रतिनिधियों के लिए होटल: 9
  • सुरक्षा अभ्यास: NSG 'कवच BRICS'
  • NSG कमांडो: करीब 100