गैस की किल्लत से राहत की तैयारी: देश में बढ़ेगा इंडक्शन चूल्हों का उत्पादन, सरकार का बड़ा फैसला
National: एलपीजी गैस की बार-बार हो रही किल्लत और बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब देश में इंडक्शन चूल्हों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि आम लोगों को रसोई के लिए गैस का वैकल्पिक और सस्ता विकल्प मिल सके.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला खास तौर पर उन इलाकों को ध्यान में रखकर लिया गया है जहां गैस सप्लाई बाधित रहती है या लोगों को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
- एलपीजी गैस की सप्लाई चेन में बार-बार रुकावट
- ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में गैस की किल्लत
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल विकल्पों को बढ़ावा देना
सरकार का मानना है कि इंडक्शन चूल्हे न सिर्फ गैस पर निर्भरता कम करेंगे, बल्कि बिजली आधारित होने के कारण ग्रीन एनर्जी मिशन को भी मजबूती देंगे.
क्या होंगे फायदे?
- गैस संकट के समय रसोई बंद नहीं होगी
- उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वैकल्पिक सुविधा
- बिजली से चलने वाला सुरक्षित और धुआं-मुक्त विकल्प
- घरेलू इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
उत्पादन और सब्सिडी पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, सरकार
- मेक इन इंडिया के तहत इंडक्शन चूल्हों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी
- कम कीमत पर इंडक्शन उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी या प्रोत्साहन योजना पर भी विचार कर रही है
- ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जा सकती है
राज्यों की भी होगी भूमिका
राज्य सरकारों को भी निर्देश दिए जा सकते हैं कि वे बिजली आपूर्ति को मजबूत करें, ताकि इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल बिना बाधा के हो सके.
क्या बदलेगी रसोई की तस्वीर?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग देश की रसोई का अहम हिस्सा बन सकती है. इससे गैस पर निर्भरता घटेगी और लोगों को संकट के समय राहत मिलेगी. सरकार के इस फैसले को गैस संकट से निपटने की दीर्घकालिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है.