अंजन कुमार झा के नेतृत्व में मोर्चे पर डटी RAF, मराठा आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन में अहम भूमिका

Mumbai news update: मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था की कमान 100 आरएएफ कंपनी ने संभाली। डिप्टी कमांडेंट अंजन कुमार झा के नेतृत्व में जवान बारिश और भीड़भाड़ के बावजूद डटे रहे और आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म कराने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मुंबई पुलिस के साथ मिलकर हालात नियंत्रित किए। झा अपनी कार्यकुशलता और सौम्य स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं और इससे पहले वैष्णो देवी मंदिर में भी उनकी सेवाएं सराही जा चुकी हैं।
 

Mumbai: मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था संभालने की बड़ी जिम्मेदारी 100 RAF कंपनी के जवानों को सौंपी गई थी। डिप्टी कमांडेंट अंजन कुमार झा के नेतृत्व में फोर्स के जवान लगातार मोर्चे पर डटे रहे और आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन में उनकी भूमिका अहम रही।

बारिश में भी चट्टान की तरह खड़े रहे जवान

मुंबई के आजाद मैदान और आसपास के इलाकों में हजारों की भीड़ मौजूद थी। लगातार बारिश के बावजूद आरएएफ के जवान बिना हिम्मत खोए अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। विरोध प्रदर्शन से पहले से लेकर आंदोलन के खत्म होने तक उनकी तैनाती और अनुशासन काबिले-तारीफ रहे।

पुलिस के साथ मिलकर निभाई जिम्मेदारी

मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन ने शहर को कई दिनों तक प्रभावित किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मराठा समाज को कुनबी श्रेणी के तहत ओबीसी कोटे में शामिल किया जाए। स्थिति तनावपूर्ण होने के बावजूद आरएएफ ने मुंबई पुलिस के साथ मिलकर हालात को नियंत्रण में रखा।

नेतृत्व की मिसाल बने अंजन कुमार झा

अहमदाबाद में तैनात 100 आरएएफ कंपनी को विशेष तौर पर मुंबई भेजा गया था। भारी भीड़ और संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने के अपने अनुभव के चलते अंजन कुमार झा ने न सिर्फ फोर्स का नेतृत्व किया, बल्कि आंदोलन की जटिलताओं को भी ईमानदारी से संभाला।

सीआरपीएफ कैडर के वरिष्ठ अधिकारी अंजन कुमार झा अपने जन-हितैषी और कार्यकुशल छवि के लिए जाने जाते हैं। उनके कार्यकाल की पहचान हमेशा सौम्य और मिलनसार व्यवहार रही है। इससे पहले माता वैष्णो देवी मंदिर में भी उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन में अहम योगदान दिया था।

सरकार ने मानी कुछ मांगें

मराठा आंदोलन के दौरान सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ गया था। हालांकि, सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें मान लीं, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो पाई। आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन में आरएएफ और पुलिस की संयुक्त भूमिका को सराहा जा रहा है।