70 अटल कैंटीनों के साथ दिल्ली में ‘सस्ती थाली’ का विस्तार, वी. के. सक्सेना और रेखा गुप्ता ने 24 नई कैंटीनों का किया शुभारंभ

 
Patna desk: राजधानी दिल्ली में जरूरतमंदों को सस्ती और सम्मानजनक भोजन सुविधा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कृष्णा नगर की नर्सरी बस्ती से डिजिटल माध्यम के जरिए 24 नई अटल कैंटीनों का शुभारंभ किया। इसके साथ ही दिल्ली में संचालित अटल कैंटीनों की संख्या बढ़कर 70 हो गई है।

उद्घाटन के बाद उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने आम नागरिकों के साथ बैठकर भोजन किया और व्यवस्था का जायजा लिया।

प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए सहारा

उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, प्रवासी मजदूरों, रिक्शा चालकों, सफाई कर्मियों और बाहर से पढ़ने आए छात्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार प्रत्येक थाली पर 25 रुपये की सब्सिडी दे रही है, ताकि मात्र 5 रुपये में पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

100 अटल कैंटीन का लक्ष्य

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अटल कैंटीन योजना केवल भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह मेहनतकश लोगों को सम्मान देने की पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता और स्वाद में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य जल्द ही 100 अटल कैंटीन संचालित करने का है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक इस योजना का लाभ पहुंच सके।

डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता

कैंटीनों में डिजिटल टोकन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और कंप्यूटराइज्ड बिलिंग की व्यवस्था की गई है। भोजन स्टील की थाली में परोसा जा रहा है, जिसमें दाल, चावल, रोटी और सब्जी शामिल है। समाज की भागीदारी बढ़ाने के लिए कॉर्पस फंड बनाने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे इच्छुक लोग विशेष अवसरों पर भोजन प्रायोजित कर सकें।

अंत्योदय के संकल्प की दिशा में कदम

कार्यक्रम में दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह योजना अंत्योदय के संकल्प को जमीन पर उतारने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि योजना की शुरुआत 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर की गई थी और अब तक लाखों लोगों को इसका लाभ मिल चुका है।

सरकार का कहना है कि यह पहल ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के सिद्धांत को मजबूत करते हुए दिल्ली में समावेशी और जवाबदेह शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।