सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: आखिर क्यों गिरी 5 मंजिला बिल्डिंग? उठ रहे हैं ये 5 बड़े सवाल
Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत ढहने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती जानकारी में बेसमेंट में चल रहे काम, पुराने ढांचे, कथित अवैध निर्माण और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल सामने आए हैं. अब सबसे बड़ा सवाल है कि इमारत की सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई और जिम्मेदारी किसकी है?
Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंज़िला इमारत ढहने से छह लोगों की मौत के बाद हादसे की वजह और जिम्मेदारी को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिस इमारत में छात्रों के लिए PG संचालित किया जा रहा था, वहां हादसे के समय बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा था। शुरुआती जांच और स्थानीय लोगों के दावों के बाद इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण में हुए बदलाव और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के बाद शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया था कि बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था और इसी दौरान एक पिलर खिसकने के बाद इमारत गिर गई। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह और इसमें किसकी लापरवाही थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्थानीय लोगों ने भी इलाके में पानी जमा होने, निर्माण गतिविधियों और पुरानी इमारतों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। अब पुलिस और दिल्ली नगर निगम की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में किए गए निर्माण और बदलाव नियमों के अनुरूप थे या नहीं।
हादसे के बाद उठ रहे हैं ये 5 बड़े सवाल
1. क्या मरम्मत से पहले इमारत की सुरक्षा जांच हुई थी?
हादसे के वक्त इमारत में मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, बेसमेंट में खुदाई के दौरान एक पिलर खिसकने की शुरुआती जानकारी सामने आई थी।
स्थानीय लोगों ने भी दावा किया कि बेसमेंट में पानी जमा रहता था और वहां काम चल रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निर्माण या मरम्मत शुरू करने से पहले इमारत की Structural Safety यानी संरचनात्मक मजबूती की जांच कराई गई थी या नहीं।
यह भी जांच का हिस्सा है कि मरम्मत के दौरान किसी ऐसे हिस्से में बदलाव तो नहीं किया गया, जो इमारत का भार संभाल रहा था।
2. क्या इमारत का निर्माण मंजूर नक्शे के मुताबिक हुआ था?
हादसे के बाद इमारत के निर्माण को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब दो साल पहले इमारत में दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं।
अब पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कब हुआ और क्या इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने भी शुरुआती तौर पर इमारत में कमजोर निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की आशंका जताई है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इमारत में हुए निर्माण और बाद के बदलाव स्वीकृत नक्शे और नियमों के मुताबिक थे?
3. क्या इमारत को PG के तौर पर चलाने की अनुमति थी?
इमारत में छात्रों के रहने के लिए PG संचालित किया जा रहा था। ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या भवन को PG के रूप में इस्तेमाल करने की आवश्यक अनुमति और मंजूरी ली गई थी।
रिहायशी मकान को PG या अन्य व्यावसायिक उपयोग में बदलने के लिए लागू नियमों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।
अगर भवन का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य से अलग तरीके से किया जा रहा था, तो यह भी जांच का अहम बिंदु होगा कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं।
4. क्या इमारत में आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम थे?
इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि किसी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
क्या इमारत में सुरक्षित निकास मार्ग, सीढ़ियां और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम निर्धारित मानकों के अनुरूप थे? क्या वहां रहने वाले लोगों को आपात स्थिति से निपटने की जानकारी दी गई थी?
हालांकि, इन सवालों के जवाब भी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
5. अगर इलाके में पहले से समस्याएं थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और MCD की निगरानी व्यवस्था को लेकर है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि इलाके में पहले भी इमारतों की स्थिति और निर्माण गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में भी स्थानीय लोग इलाके में पुराने और बदले हुए भवनों को लेकर चिंता जताते दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि इलाके में कई रिहायशी मकानों को PG में बदलने का चलन बढ़ा है।
मेयर प्रवेश वाही ने भी कहा है कि आगे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि घर को PG में बदलने वाले मकान मालिक निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें।
ऐसे में सवाल यह है कि अगर इलाके में बड़े पैमाने पर रिहायशी इमारतों का इस्तेमाल PG के तौर पर हो रहा था और भवनों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें थीं, तो क्या MCD ने समय रहते इन इमारतों का व्यवस्थित सुरक्षा सर्वे किया था?
जांच से सामने आएगा हादसे का असली कारण
सत्य निकेतन हादसे में छह लोगों की मौत के बाद अब सबसे अहम बात यह है कि जांच एजेंसियां हादसे की वास्तविक वजह तक पहुंचें। क्या बेसमेंट में चल रहा काम इमारत गिरने की वजह बना, क्या निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ, क्या अतिरिक्त मंजिलें बिना अनुमति के बनाई गईं या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई—इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
फिलहाल, हादसे ने दिल्ली में पुरानी इमारतों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और रिहायशी भवनों को PG में बदलने की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नियमों का उल्लंघन हुआ था, तो उसे हादसे से पहले क्यों नहीं रोका गया?
नोट: हादसे की वजह और किसी व्यक्ति/विभाग की जिम्मेदारी से जुड़े दावे फिलहाल जांच के दायरे में हैं। अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।