शौकत मोल्ला के बेटे के कैफे पर बुलडोजर, दस्तावेज नहीं दिखाने पर प्रशासन ने गिराया अवैध निर्माण
West Bengal: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में प्रशासन ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और नेता शौकत मोल्ला के बेटे इमरान मोल्ला के स्वामित्व वाले चर्चित कैफे ‘अरण्येर कूले’ को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी. प्रशासन का आरोप है कि यह कैफे मातला नदी के किनारे अवैध रूप से कब्जा की गई चर भूमि पर बनाया गया था और इसके निर्माण के दौरान मैंग्रोव क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचाया गया.
प्रशासन ने पहले इमरान मोल्ला को जमीन और निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए गए. इसके बाद सात दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का आदेश जारी किया गया था और चेतावनी दी गई थी कि आदेश का पालन नहीं होने पर बुलडोजर चलाकर ढांचा गिराया जाएगा, जिसका खर्च भी मालिक से वसूला जाएगा.
गुरुवार सुबह भारी पुलिस बल और केंद्रीय बल की मौजूदगी में कैफे तोड़ने का काम शुरू हुआ. मौके पर कैनिंग महकमा प्रशासन, पुलिस अधिकारी और जीवनतला थाने के अधिकारी मौजूद रहे. किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया. यह कैफे पहली बार तब सुर्खियों में आया जब पूर्व विधायक मोल्ला की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों की नजर उनके परिवार की संपत्तियों पर पड़ी. जांच के दौरान प्रशासन को जानकारी मिली कि इमरान मोल्ला ने अपने पिता के विधायक रहने के दौरान मौखाली पुल के पास सड़क से सटी मातला नदी की जमीन पर यह आलीशान कैफे बनवाया था. आरोप है कि निर्माण के दौरान नियमों और सरकारी अनुमति की पूरी तरह अनदेखी की गयी.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इमरान मोल्ला को कैफे से जुड़े सभी दस्तावेज लेकर महकमा शासक (एसडीओ) कार्यालय में पेश होने को कहा गया था. दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि जिस जमीन पर कैफे बनाया गया, वह सिंचाई विभाग की भूमि है और उस पर निजी निर्माण की कोई वैध अनुमति नहीं थी. इसके बाद एसडीओ ने निर्माण को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया. बताया गया है कि 29 जून को ही निर्माण हटाने का अंतिम निर्देश दिया गया था. चूंकि मालिक पक्ष ने आदेश का पालन नहीं किया, इसलिए प्रशासन ने सीधे बुलडोजर कार्रवाई की. इस तोड़फोड़ अभियान में आने वाला पूरा खर्च भी मालिक पक्ष से वसूला जायेगा.
मौखाली में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तृणमूल के पूर्व विधायक मोल्ला खुद एक अन्य आपराधिक मामले में पुलिस हिरासत में हैं. एक दुष्कर्म मामले में आरोपी के तौर पर वह फिलहाल जीवनतला थाने की हिरासत में हैं. इसी बीच उनके बेटे की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई ने इलाके में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है. प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है.
अधिकारियों के अनुसार, नदी की जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. जांच और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों समानांतर रूप से नियमों के तहत आगे बढ़ रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक यह कैफे खुलेआम चलता रहा और किसी ने कार्रवाई नहीं की. लेकिन राजनीतिक बदलाव के बाद अब पुराने मामलों की परतें खुल रही हैं. इस कार्रवाई को लेकर इलाके में व्यापक चर्चा है और लोग इसे अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन के बड़े संदेश के तौर पर देख रहे हैं.