कोलकाता वालों को झटका! बढ़ सकता है कैब का किराया, CNG से लेकर EV तक पर मंथन

Kolkata: पश्चिम बंगाल में ऐप आधारित कैब सेवाओं को लेकर परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने कैब संचालकों और अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में कैब किराया संशोधन और CNG की उपलब्धता प्रमुख मुद्दे रहे. अधिकारियों के मुताबिक, मंत्री ने पर्याप्त CNG आपूर्ति सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं.
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार सक्रिय हो गई है। परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने ऐप कैब संचालकों की समस्याओं और मांगों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कैब किराया संशोधन, CNG की उपलब्धता, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्राइवरों की शिकायतों समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि बैठक के दौरान मंत्री ने कैब संचालकों की ओर से उठाई गई समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

CNG की कमी बनी प्रमुख चिंता

बैठक में CNG की कथित कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, कैब संचालकों ने CNG की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कैब संचालन के लिए पर्याप्त CNG उपलब्ध कराने की दिशा में जरूरी कदम उठाए जाएं। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक CNG आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क करने को भी कहा गया है।

कैब संचालकों का कहना है कि ईंधन की उपलब्धता और कीमतों का सीधा असर कैब संचालन की लागत पर पड़ता है। ऐसे में CNG की नियमित आपूर्ति उनके लिए महत्वपूर्ण है।

कैब किराया संशोधन पर भी चर्चा

बैठक में कैब किराए में संशोधन का मुद्दा भी उठाया गया। हालांकि, किराए में बढ़ोतरी को लेकर तत्काल कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

कैब ऑपरेटर लंबे समय से परिचालन लागत, ईंधन खर्च और ड्राइवरों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को देखते हुए किराए की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया और निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत

ऐप कैब संचालकों ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का मुद्दा भी बैठक में उठाया।

अधिकारियों के मुताबिक, शहर में इलेक्ट्रिक कैब की संख्या बढ़ने के साथ पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दिशा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी बैठक में चर्चा हुई।

कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में लगाए गए वाहनों के मुआवजे का मुद्दा

बैठक में कानून-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी के लिए प्रशासन द्वारा अधिग्रहित किए जाने वाले व्यावसायिक वाहनों के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया गया।

इसके अलावा कैब चालकों की शिकायतों के समाधान के लिए उचित व्यवस्था बनाने और उनकी समस्याओं पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

निजी वाहनों के ऐप कैब के रूप में इस्तेमाल पर सख्ती

बैठक में निजी या गैर-व्यावसायिक वाहनों को ऐप के माध्यम से कैब के तौर पर संचालित किए जाने की शिकायतों पर भी गंभीरता से चर्चा हुई।

परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि ऐसे वाहनों के मालिकों और संचालकों को सात दिन का समय दिया जाना चाहिए, ताकि वे स्वेच्छा से एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के जरिए किराये पर वाहन उपलब्ध कराने की सेवा से बाहर हो सकें।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी यदि ऐसे वाहनों का संचालन जारी रहता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कोलकाता में करीब 21 हजार ऐप कैब

परिवहन विभाग के अधिकारी के अनुसार, फिलहाल कोलकाता शहर में करीब 21 हजार कैब संचालित हो रही हैं। ऐसे में किराया, CNG आपूर्ति, EV चार्जिंग और नियमों के पालन से जुड़े फैसलों का सीधा असर बड़ी संख्या में कैब संचालकों और यात्रियों पर पड़ सकता है।

फिलहाल कैब किराए में संशोधन को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। वहीं CNG की उपलब्धता और निजी वाहनों के ऐप कैब के रूप में संचालन पर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर भी नजर रहेगी।