जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के खिलाफ सपा का शक्ति प्रदर्शन, 8 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा रामपुर; बोले- ‘38 भवनों को नहीं गिरने देंगे’
UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के प्रशासनिक आदेश के विरोध में शुक्रवार को सपा के आठ सांसदों समेत 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
सपा सांसदों ने स्पष्ट कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हजारों छात्र-छात्राओं के भविष्य से जुड़ा शिक्षण संस्थान है। पार्टी किसी भी कीमत पर इसके भवनों को गिराने की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगी। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेकर मामले का समाधान कानून के दायरे में किया जाए।
दोपहर करीब सवा बजे सपा सांसदों का काफिला रामपुर पहुंचा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल जौहर यूनिवर्सिटी परिसर गया, जहां धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं से मुलाकात की। सांसदों ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और डीएम को ज्ञापन सौंपा। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। सांसदों का कहना है कि प्रशासन को ध्वस्तीकरण के बजाय नियमों के तहत उचित कानूनी समाधान तलाशना चाहिए।
‘यूनिवर्सिटी नहीं गिरने देंगे’, सांसदों ने खोला मोर्चा
मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को किसी भी कीमत पर गिरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ भवनों का नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य का है। समाजवादी पार्टी छात्रों के अधिकारों के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएगी।
संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगे।
वहीं, कैराना की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि जौहर यूनिवर्सिटी को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि इसकी स्थापना आजम खान ने की थी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नक्शे को आधार बनाकर कार्रवाई की जा रही है तो ऐसे कई पुराने भवनों पर भी सवाल खड़े होंगे।
राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को गिराने का आदेश गैरकानूनी है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार को नए शिक्षण संस्थान बनाने और शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए, न कि मौजूदा संस्थानों को गिराने पर।
सपा का दावा- निर्माण के समय नहीं थी अनुमति की जरूरत
प्रतिनिधिमंडल की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरा होने के बाद सींगनखेड़ा को रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के क्षेत्र में शामिल किया गया। सपा का कहना है कि निर्माण के समय संबंधित क्षेत्र पंचायत क्षेत्र में था और उस समय मौजूदा नियमों के तहत आरडीए से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी।
सपा ने प्रशासनिक कार्रवाई को छात्र और जनहित के खिलाफ बताते हुए 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश रद्द करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस कार्रवाई से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की शिक्षा प्रभावित होगी और उनके भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद जावेद अली खान, हरेंद्र मलिक, रुचि वीरा, इकरा हसन, नीरज मौर्य, जियाउर्रहमान बर्क, देवेश शाक्य और राम शिरोमणि वर्मा समेत अन्य नेता शामिल रहे। इसके बाद सांसद आजम खान के आवास पर पहुंचे और उनकी पत्नी तजीन फात्मा से भी मुलाकात की।
अब जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों को लेकर प्रशासन और समाजवादी पार्टी के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं। एक ओर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी तरफ सपा ने इस मुद्दे को छात्रों और शिक्षा के अधिकार से जोड़ते हुए आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं।