यूपी में चकबंदी और स्कूलों को लेकर सख्ती, किसानों की जमीन कटौती से लेकर सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों पर नए निर्देश

 

Up News: उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों और सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बढ़ाई है। एक ओर चकबंदी प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने और किसानों की कृषि भूमि की जरूरत से ज्यादा कटौती पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं का तथ्यात्मक जवाब देने की व्यवस्था मजबूत की गई है।

चकबंदी योजना में बदलाव के लिए अब आयुक्त की मंजूरी जरूरी

चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने निर्देश दिया है कि प्रारंभिक चकबंदी योजना को प्रत्यावर्तित करने से पहले चकबंदी आयुक्त की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। योजना का प्रत्यावर्तन केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा।

इसके लिए जिलाधिकारी और जिला उप संचालक चकबंदी की संस्तुति के साथ प्रस्ताव चकबंदी आयुक्त को भेजना होगा। आयुक्त की अनुमति मिलने के बाद ही प्रत्यावर्तन का आदेश जारी किया जा सकेगा।

किसानों की जमीन की कटौती पर भी नियंत्रण

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक प्रयोजन के लिए सामान्यतः तीन प्रतिशत से अधिक भूमि की कटौती नहीं की जाएगी। चकबंदी आयुक्त ने कहा कि अनावश्यक भूमि कटौती से किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि प्रभावित होती है।

यदि किसी गांव में अपरिहार्य परिस्थिति के कारण तीन प्रतिशत से अधिक भूमि लेना जरूरी हो, तो जिलाधिकारी और जिला उप संचालक चकबंदी के माध्यम से विस्तृत प्रस्ताव आयुक्त को भेजना होगा। अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारित सीमा से अधिक भूमि की कटौती की जा सकेगी।

अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। आदेशों की अनदेखी या अनावश्यक भूमि कटौती मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

स्कूलों से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं पर भी प्रशासन की नजर

इसी बीच बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े सरकारी व निजी स्कूलों के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं को लेकर भी प्रशासन को सतर्क किया गया है।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सोशल मीडिया, मास मीडिया या किसी अन्य माध्यम से स्कूलों से संबंधित शिकायत सामने आने पर उसकी तत्काल जांच कराई जाए।

जांच के बाद वास्तविक और प्रमाणिक स्थिति को संबंधित जिलाधिकारी के सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि गलत सूचना की जगह लोगों को सही तथ्य मिल सकें।

स्कूलों की सुविधाओं और संवाद पर भी जोर

मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देशों में सरकारी और निजी स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं को बेहतर करने, साफ-सफाई सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों व अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।

प्रशासन का उद्देश्य शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय उनकी वास्तविक स्थिति सामने लाना है। सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति बनने पर जिला प्रशासन तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराएगा।

इस तरह सरकार के नए निर्देशों में एक तरफ किसानों की भूमि और चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया गया है, तो दूसरी ओर स्कूलों से जुड़े मामलों में सही सूचना और त्वरित जवाब देने की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई है।