यौन शोषण केस में दोषी करार तरुण तेजपाल, 10 साल की कैद..4 हफ्ते में करना होगा आत्मसमर्पण...

National: फैसला सुनाने वाली बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर ने कहा कि निचली अदालत का बरी करने का आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहींता, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है और आरोपी को दोषी ठहराया जाता है.
 

National: 'तहलका' पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के चर्चित यौन शोषण मामले में बड़ा झटका लगा है. बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने तेजपाल को चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है.

पहले दो हफ्ते, फिर बढ़ाकर चार हफ्ते की मोहलत

शुरुआत में अदालत ने तेजपाल को आत्मसमर्पण के लिए दो सप्ताह का समय दिया था. हालांकि, उनके वकील के अनुरोध पर कोर्ट ने यह अवधि बढ़ाकर चार सप्ताह कर दी. इस दौरान उन्हें निर्धारित समय के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष सरेंडर करना होगा.

हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

फैसला सुनाने वाली बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर ने कहा कि निचली अदालत का बरी करने का आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहींता, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है और आरोपी को दोषी ठहराया जाता है.

फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में 62 वर्षीय तरुण तेजपाल ने कहा कि वह हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

किन धाराओं में ठहराया गया दोषी?

अदालत ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की निम्न धाराओं के तहत दोषी माना-

  • धारा 376(2)(F): विश्वास या अधिकार की स्थिति का दुरुपयोग कर दुष्कर्म.
  • धारा 354(A): यौन उत्पीड़न.
  • धारा 354(B): महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग.

अदालत में नरमी की अपील

सजा पर सुनवाई के दौरान तेजपाल ने खुद को "राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार" बताते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि वह दो बेटियों के पिता हैं, वरिष्ठ नागरिक हैं और उनकी उम्र व पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए.

गोवा सरकार ने मांगी थी अधिकतम सजा

गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि पीड़िता आरोपी की कनिष्ठ सहकर्मी होने के साथ-साथ उसकी बेटी की मित्र भी थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि "नहीं का मतलब नहीं" होता है और इस मामले में ऐसा फैसला जरूरी है जो समाज में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दे.

मेहता ने निचली अदालत की उस सोच पर भी सवाल उठाया जिसमें यौन उत्पीड़न की शिकार महिला के व्यवहार को लेकर पूर्व निर्धारित मानकों की अपेक्षा की गई थी.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान एक 5-स्टार होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर अपनी कनिष्ठ सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था. मई 2021 में गोवा की सत्र अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बंबई हाई कोर्ट की गोवा पीठ में चुनौती दी. अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है और 10 साल की सजा सुनाई है.