बंगाल सरकार का बड़ा ऐलान, सुंदरवन और सौर ऊर्जा को मिलेगी खास प्राथमिकता

Kolkata: बंगाल के नये वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) ने 22 जून को विधानसभा में जो बजट पेश किया, वह पूरी तरह से पर्यावरण स्थिरता और सामाजिक समानता पर केंद्रित है.
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल सरकार ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए बजट का 69 प्रतिशत हिस्सा जलवायु-संबंधी योजनाओं और परियोजनाओं पर खर्च करने का ऐलान किया है. सरकार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.

राज्य सरकार ने विशेष रूप से सुंदरवन क्षेत्र के संरक्षण और विकास पर जोर दिया है. समुद्र के बढ़ते जलस्तर, तटीय कटाव और चक्रवातों से प्रभावित सुंदरवन के लिए कई नई परियोजनाओं की घोषणा की गई है. इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय आबादी की सुरक्षा बढ़ाना और क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संरक्षित रखना है. 

बंगाल के नये वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) ने 22 जून को विधानसभा में जो बजट पेश किया, वह पूरी तरह से पर्यावरण स्थिरता और सामाजिक समानता पर केंद्रित है.

पहली बार पेश हुआ 4.38 लाख करोड़ का बंगाल बजट

पश्चिम बंगाल के इतिहास में पहली बार 4.38 लाख करोड़ के बजटीय आवंटन में से लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा (3.01 लाख करोड़ रुपए) संयुक्त राष्ट्र (UN) के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDG) से जोड़ा गया है. इस महत्वकांक्षी कसरत को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के तकनीकी सहयोग से पूरा किया गया है.

शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में असमानता को कम करने के लिए 53 हजार करोड़ रुपए का आवंटन बजट में किया है. इसके अलावा गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास और रोजगार के अलावा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए भी भारी-भरकम आवंटन किया है. ये आवंटन सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए किये गये हैं.

  • असमानता को कम करना : असमानता को कम करने के लिए (एसडीजी 10) करीब 53,000 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा आवंटन किया गया है.
  • गरीबी उन्मूलन : गरीबी को खत्म करने वाले एसडीजी-1 के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 31,408 करोड़ रुपए आवंटित किये गये हैं.
  • आर्थिक विकास और रोजगार : आर्थिक विकास और रोजगार (एसडीजी-8) के लिए 28,549 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने एसडीजी-4 को ध्यान में रखते हुए 28,350 करोड़ रुपए आवंटित किये हैं.

सुंदरवन को संरक्षित करने के लिए 4 विशेष पहल

  1. इस बजट में चक्रवातों की मार झेलने वाले सुंदरवन (Sundarbans) के विकास को लेकर एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव किया गया है. पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के ब्रिज-केंद्रित (पुल निर्माण) मॉडल की जगह, जलमार्गों और पर्यावरण अनुकूल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है. नयी सरकार का मानना है कि पुल केंद्रित विकास ने मैंग्रोव इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया.
  2. सुंदरवन के द्वीपों के बीच सुरक्षित कनेक्टिविटी के लिए 100 करोड़ रुपए की लागत से पोंटून-आधारित पुल (Pontoon Jetties) का निर्माण किया जायेगा.
  3. कार्बन उत्सर्जन का स्तर कम करने के लिए यात्रियों और माल ढुलाई हेतु सौर ऊर्जा से चलने वाली नावें (Solar-operated Boats) चलायी जायेंगी.
  4. प्रकृति-आधारित तकनीकों (Nature-based Technologies) का उपयोग करके सुंदरवन के लगभग 60 किलोमीटर लंबे तटबंधों (Embankments) का पुनर्निर्माण किया जायेगा.

गंगासागर मेले के धार्मिक और राजनीतिक महत्व को देखते हुए पूर्ववर्ती सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गंगासागर ब्रिज परियोजना’ के शुरुआती कार्यों के लिए भी फंड को क्लियरेंस दे दी गयी है. इतना ही नहीं, लंबे समय से केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही 2 बड़ी योजनाओं – अपर सुंदरवन डेल्टा प्रोजेक्ट (1,353 करोड़ रुपए, एशियाई विकास बैंक द्वारा वित्त पोषित) और लोअर सुंदरवन डेल्टा प्रोजेक्ट (4,100 करोड़ रुपए, विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित) को हरी झंडी दे दी गयी है. ये परियोजनाएं 50 लाख से अधिक लोगों और मैंग्रोव जंगलों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचायेंगी.

पर्यावरण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने दो नये और बड़े संस्थानों की घोषणा की. राज्य में पश्चिम बंगाल जलवायु सहिष्णु कोष (West Bengal Climate Resilient Fund) और पश्चिम बंगाल जलवायु वित्त सुविधा (West Bengal Climate Finance Facility) की स्थापना की जायेगी.

इसके लिए बजट में शुरुआती तौर पर 200 करोड़ का फंड रखा गया है. इसके जरिये राज्य में पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश जुटाया जायेगा. कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits) के माध्यम से राज्य के लिए राजस्व (कमाई) के नये रास्ते खोले जायेंगे. नाबार्ड (NABARD) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने इस दूरदर्शी कदम का स्वागत किया है.

बजट में बंगाल की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हरित ऊर्जा पर विशेष जोर दिया गया है. वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य में बिजली की पीक डिमांड फिलहाल 13 गीगावॉट (GW) है, जो 2 साल में बढ़कर 16 गीगावॉट और वर्ष 2035 तक 27 गीगावॉट होने का अनुमान है.

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बीरभूम जिले के बकरेश्वर बांध (Bakreshwar Dam) पर 2,000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से एक मेगा फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट (Floating Solar Project) स्थापित किया जायेगा, जो बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) से लैस होगा.

केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना

केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत बंगाल में 2,00,000 घरों की छतों पर सोलर पैनल (Rooftop Solar) लगाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि सौर ऊर्जा के साथ-साथ सरकारी और निजी क्षेत्रों के माध्यम से नये थर्मल पावर (कोयला आधारित) प्लांट भी लगाये जायेंगे.

प्रख्यात पर्यावरणविद विश्वजीत मुखर्जी ने बजट प्रावधानों की सराहना की है. उन्होंने इसमें कुछ कमियों की ओर भी इशारा किया है. उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य पर्यावरण विभाग का सालाना बजट अब भी 100 करोड़ के आसपास ही है, जो इतने बड़े लक्ष्यों के लिए बहुत कम है. उन्होंने कहा कि बजट में वायु प्रदूषण (Air Pollution), नदियों के प्रदूषण (River Pollution), अवैध पटाखा फैक्ट्रियों के संकट, जूट उद्योग के पुनरोद्धार, जलाशयों पर अवैध कब्जों और नदियों से होने वाले अवैध बालू खनन (Sand Mining) जैसे जमीनी मुद्दों पर कोई रोडमैप पेश नहीं किया गया है. आने वाले दिनों में इन्हें ठीक करना जरूरी होगा.