आखिरी मांग पूरी, लेकिन क्या खत्म होगा CJP का आंदोलन? सरकार के फैसले के बाद भी जारी है सस्पेंस

Dharmendra Pradhan Resigns: इस बीच सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिनमें कुछ मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी. यानी जिस मांग को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन की 'रेड लाइन' बता रही थी, वह पूरी हो गई है. लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इसके साथ आंदोलन भी खत्म हो जाएगा? 
 
 

Dharmendra Pradhan Resigns: देशभर में चर्चा का केंद्र बने CJP (Cockroach Janta Party) के आंदोलन ने शनिवार को बड़ा मोड़ ले लिया. आंदोलनकारियों की जिस आखिरी प्रमुख मांग पर कई दिनों से सरकार और CJP के बीच गतिरोध बना हुआ था, उस पर सरकार ने फैसला ले लिया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

करीब तीन सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन के दौरान छात्रों, युवाओं और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी. इस बीच सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, जिनमें कुछ मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी थी.

यानी जिस मांग को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन की 'रेड लाइन' बता रही थी, वह पूरी हो गई है. लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इसके साथ आंदोलन भी खत्म हो जाएगा? 

NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आईं तो देशभर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. सरकार ने सीबीआई जांच बिठाई, परीक्षा रद्द की और दोबारा एग्जाम कराने का फैसला लिया. अगले साल से परीक्षा को पूरी तरह CBT (Computer Based Test) मोड में कराने का भी ऐलान किया गया. 

लेकिन सड़क पर उतरे छात्रों का कहना था कि सिर्फ जांच और दोबारा परीक्षा काफी नहीं है. जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए. यहीं से आंदोलन में CJP की एंट्री हुई और धीरे-धीरे उसकी सबसे बड़ी मांग बन गई- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा... बीते दिनों सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत हुई. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. 

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उस मांग को पूरा कर रहा है, जिसे CJP लगातार अपनी सबसे अहम शर्त बता रही थी. यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि CJP की मांगों की सूची सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं थी.  संगठन परीक्षा सिस्टम में बड़े सुधार, पेपर लीक के दोषियों पर सख्त एक्शन, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने यानी आंदोलन की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि CJP इसे अपनी जीत घोषित कर धरना खत्म करती है या बाकी मुद्दों पर भी सरकार से लिखित आश्वासन मिलने तक संघर्ष जारी रखती है. फिलहाल इतना तय है कि जिस मांग पर सरकार और आंदोलन के बीच सबसे लंबी रस्साकशी चल रही थी, वह गांठ अब खुल गई है. अब अगला कदम आंदोलनकारियों का होगा. 

क्या थीं CJP की प्रमुख मांगें?

आंदोलन के दौरान CJP ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें कथित NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करना, प्रभावित परिवारों को मुआवजा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख था. सरकार ने पहले कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया था, लेकिन मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ था.

क्या अब आंदोलन खत्म होगा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह माना जा रहा था कि CJP आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर सकता है. हालांकि CJP नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने का फैसला सामूहिक चर्चा के बाद लिया जाएगा. कुछ नेताओं का कहना है कि केवल इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और अन्य लंबित मांगों पर भी ठोस कार्रवाई जरूरी है.

सरकार की कोशिश, बातचीत का रास्ता खुला

सरकार लगातार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है. केंद्र ने परीक्षा सुधारों, पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नरम रुख जैसे कदमों का भी संकेत दिया है. सरकार का कहना है कि युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाएगा और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा.

आगे क्या?

अब सबकी नजर CJP के अगले आधिकारिक ऐलान पर है. यदि संगठन सरकार के कदमों को पर्याप्त मानता है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है. वहीं यदि बाकी मांगों पर संतोषजनक प्रगति नहीं होती है, तो आंदोलन किसी नए स्वरूप में जारी रहने की संभावना भी बनी हुई है. फिलहाल देशभर के छात्र और राजनीतिक हलके CJP की अगली रणनीति का इंतजार कर रहे हैं.