आयकर विभाग के नए नियम 1 अप्रैल से लागू, नौकरीपेशा लोगों के लिए जानना जरूरी...

National: सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए कंपनी सुविधाओं के नियम सख्त होंगे. मुफ्त खाने (फ्री मील्स) पर सिर्फ 200 रुपये तक छूट मिलेगी. कंपनी से 15,000 रुपये से ज्यादा का गिफ्ट मिलने पर टैक्स लगेगा. कंपनी द्वारा दिया गया घर (अकोमोडेशन) की वैल्यू अब शहर की आबादी के आधार पर तय होगी, जिससे टेक-होम सैलरी में बदलाव आ सकता है.
 

National: भारत में 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स से जुड़े बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं. मौजूदा आयकर अधिनियम 1961 की जगह नया आयकर नियम 2026 आ जाएंगे. ये बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल और बेहतर बनाने के लिए हैं. सैलरी क्लास, मध्यम वर्ग और बिजनेस पर इनका सीधा असर पड़ेगा. टैक्स स्लैब या दरों में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन सैलरी से जुड़ी सुविधाओं, ESOP, डिजिटल टैक्स और अन्य नियमों में अहम बदलाव हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं क्या-क्या बदल रहा है

HRA (हाउस रेंट अलाउंस) से जुड़े नियम

  • ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों को ही HRA की छूट मिलती रहेगी.
  • न्यू टैक्स रिजीम में HRA पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी.
  • HRA क्लेम के लिए रेंट एग्रीमेंट, मकान मालिक का PAN (अगर सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा है) अनिवार्य रहेगा.

गलत या फर्जी HRA क्लेम पर अब सख्त जांच की जा सकती है.

बच्चों से जुड़े भत्तों में बदलाव

  • Children Education Allowance और Hostel Allowance पर मिलने वाली टैक्स छूट सिर्फ ओल्ड रिजीम में ही लागू रहेगी.
  • न्यू टैक्स रिजीम में ये दोनों भत्ते पूरी तरह टैक्सेबल माने जाएंगे.

गिफ्ट पर टैक्स का नियम

  • अगर किसी व्यक्ति को एक साल में ₹50,000 से ज्यादा का गिफ्ट (कैश, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी आदि) मिलता है, तो वह टैक्सेबल होगा.
  • हालांकि रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट, शादी में मिला गिफ्ट या वसीयत के तहत मिली संपत्ति पर टैक्स नहीं लगेगा.

न्यू टैक्स रिजीम को बनाया गया डिफॉल्ट

  • 1 अप्रैल से न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट विकल्प रहेगी.
  • अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना चाहते हैं, तो आपको खुद से चयन करना होगा.

सैलरी वालों के लिए क्या जरूरी है?

  • अब सैलरी स्लिप और ITR में डाटा का मिलान सख्त होगा.
  • HRA, भत्तों और गिफ्ट की जानकारी Income Tax Department के पास पहले से उपलब्ध डाटाबेस से मैच की जाएगी.

1 अप्रैल से लागू होने वाले ये बदलाव टैक्स प्लानिंग को सीधे प्रभावित करेंगे. इसलिए सैलरी पाने वाले लोग समय रहते यह तय करें कि उन्हें ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम में से कौन-सी ज्यादा फायदेमंद है.