अब सुप्रीम कोर्ट में 38 जज होंगे, संसद से पारित हुआ न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2026
Rajya Sabha: देश की सर्वोच्च न्यायपालिका को और मजबूत बनाने की दिशा में संसद ने बड़ा कदम उठाया है. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है. इस विधेयक के लागू होने के बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित कुल न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी. सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी.
राज्यसभा में कानून मंत्री ने पेश किया विधेयक
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में इस विधेयक को चर्चा और विचार के लिए पेश किया. हालांकि, विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में विपक्षी दलों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी की. उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा. इसके बावजूद विधेयक पर चर्चा शुरू कराई गई.
विपक्ष ने किया वॉकआउट, फिर चर्चा में लौटा
विधेयक पर चर्चा शुरू होने के दौरान कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया. हालांकि, बाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रमुक (DMK), आम आदमी पार्टी (AAP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), माकपा (CPI-M) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सदस्य वापस सदन में लौटे और चर्चा में हिस्सा लिया.
लंबित मामलों के निपटारे में आएगी तेजी
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह संशोधन न्यायिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों की सुनवाई तेज होगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी. सरकार का उद्देश्य न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाना और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है.
1950 में केवल 8 जज थे, अब होंगे 38
कानून मंत्री ने बताया कि वर्ष 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के समय मुख्य न्यायाधीश सहित कुल आठ न्यायाधीश थे. समय के साथ बढ़ते मामलों और न्यायिक जरूरतों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या कई बार बढ़ाई गई. इस संशोधन के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में कुल 38 न्यायाधीश कार्यरत हो सकेंगे.
मई में आया था अध्यादेश
अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष मई 2026 में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके बाद सरकार अध्यादेश लेकर आई, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है. इसके बाद मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को यह विधेयक संसद में पेश किया गया, जिसे अब दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है.
2019 में हुई थी पिछली बढ़ोतरी
इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई थी. उस समय मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी, यानी कुल संख्या 34 हो गई थी. अब नए संशोधन के बाद यह संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी
न्यायपालिका को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों का बोझ कम करने, संवैधानिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और आम लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. सरकार का कहना है कि यह फैसला न्यायिक प्रणाली को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.