शिरडी के साईं मंदिर में होली मनाने की प्राचीन काल से चली आ रही पुरानी परंपरा, लेकिन चंद्र ग्रहण के इस बार कारण 3 मार्च को बंद रहेंगे मंदिर के कपाट
Shirdi: साईं बाबा के गुरुस्थान मंदिर के सामने पारंपरिक तरीके से होली की पूजा की गई और होलिका दहन संपन्न हुआ. इस दौरान साईं बाबा संस्थान के अधिकारियों और भक्तों ने अपनी हथेली से शंखनाद किया. साईं बाबा के चरणों में प्रार्थना की कि मन की सभी बुरी प्रवृत्तियां शांत हो जाएं. शिरडी के साईं मंदिर में होली मनाने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है.
होली के पावन अवसर पर साईं बाबा संस्थान द्वारा समाधि मंदिर और उसके आसपास के परिसर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है. मंदिर के गुरुस्थान के सामने एरंड (castor), फूलों के हार, गन्ना और पांच उपलों को रखकर होली तैयार की गई. इसके बाद संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने विधिवत पूजा कर होलिका दहन किया.
होलिका दहन के पश्चात साईं बाबा की दोपहर की आरती की गई. मन के भीतर के बुरे विचारों और प्रवृत्तियों को नष्ट करने के प्रतीक के रूप में यह उत्सव आज और कल मनाया जा रहा है. आज से साईं बाबा की मूर्ति को शक्कर की गाठों (गाठी) की माला पहनाई गई है.
इस अवसर पर संस्थान और भक्तों की ओर से यह प्रार्थना की गई कि देश और राज्य के किसान सुखी और समृद्ध रहें. होली की पूजा इस मनोकामना के साथ की गई कि किसानों के साथ-साथ साईं की शिरडी में भी खुशहाली आए और समाज से बुरी प्रवृत्तियों का नाश हो.
चंद्र ग्रहण के कारण दर्शन व्यवस्था रहेगी बंद
साईं बाबा संस्थान के उप कार्यकारी अधिकारी भीमराज दराडे ने बताया कि 3 मार्च को लगने वाले खग्रास चंद्र ग्रहण के कारण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:48 बजे तक (लगभग 3 घंटे 28 मिनट) साईं बाबा समाधि मंदिर और परिसर के अन्य सभी मंदिरों में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी. इस दौरान भक्तों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. परंपरा के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान मंदिर के 10 से 15 पुजारी समाधि मंदिर में विशेष पूजा, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान जारी रखेंगे.
शुद्धिकरण और नियमित आरती
ग्रहण समाप्त होने के बाद, शाम 7 बजे साईं बाबा की मूर्ति का मंगल स्नान (शुद्धिकरण) किया जाएगा. इसके बाद 'शिर्डी माझे पंढरपुर' की आरती और धूप आरती संपन्न होगी. सभी धार्मिक विधियां पूरी होने के बाद भक्तों के लिए दर्शन फिर से शुरू कर दिए जाएंगे. रात 10 बजे नियमित शेजारती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे.