इस ट्रैकिंग आइडेंटिटी कार्ड के जरिये, हम तुरंत स्टूडेंट की लोकेशन जान पाएंगे, और पेरेंट्स भी...छात्रों के लिए स्मार्ट आई-कार्ड, जानिए कैसे Work करता है...

 

Kolkata: पश्चिम बंगाल के कई स्कूलों में टेक्नोलॉजी वाले स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड का इस्तेमाल शुरू हो गया है. इन कार्ड से, जैसे ही बच्चा स्कूल आने पर बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से अपनी अटेंडेंस रजिस्टर करता है, माता-पिता को उनके स्मार्टफोन पर एक नोटिफिकेशन मिलता है.

अब, ओडिशा के नौवीं कक्षा के छात्र आयुष कुमार डे ने एक और भी एडवांस्ड स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड पेश किया है. इस आईडी कार्ड में एक SOS या इमरजेंसी पुश बटन और एक GPS ट्रैकिंग सिस्टम शामिल है.

ओडिशा आदर्श विद्यालय के छात्र आयुष ने हाल ही में कोलकाता में ईस्टर्न इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेयर (EISF) में यह तकनीक पेश की. यह फेयर शहर के बालीगंज क्षेत्र में बिरला इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम में आयोजित किया गया था, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम की एक यूनिट है.
आयुष ने ईटीवी भारत को बताया, "स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड को RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन), GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम), GSM/Wi-Fi कनेक्टिविटी और माइक्रोकंट्रोलर-बेस्ड ऑटोमेशन को इंटीग्रेट करके बनाया गया है.
यह स्मार्ट आईडी कार्ड स्टूडेंट या कार्डहोल्डर की लोकेशन ट्रैक करने और अभिभावकों, संबंधित अधिकारियों और पुलिस को इमरजेंसी मैसेज भेजने में सक्षम है. इसके अलावा, यह कार्ड सुरक्षा, आपातकालीन संचार और डिजिटल रिकॉर्ड मैपिंग के लिए सुविधाजनक है. शुरुआती चरण में, यह कार्ड काफी बड़ा और भारी होता है. हालांकि, इसे छोटा और हल्का बनाना संभव है."
कैसे काम करता है स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड
स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड सिस्टम को Arduino Nano माइक्रोकंट्रोलर से नियंत्रित किया जाता है, जिसमें कई इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल होते हैं. अभी, राज्य और देश के कई शैक्षणिक संस्थान हर स्टूडेंट को RFID टैग वाला स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड देते हैं. जब कोई स्टूडेंट स्कूल में आता है, तो RFID रीडर कार्ड को स्कैन करता है. नतीजतन, माइक्रोकंट्रोलर एक विशिष्ट पहचान (Unique Identification) नंबर भेजता है, और यह जानकारी अपने आप स्कूल में स्टूडेंट की अटेंडेंस रिकॉर्ड कर लेती है. इससे मैनुअल उपस्थिति दर्ज करने की जरूरत खत्म हो जाती है.
हालांकि, मयूरभंज जिले के जमीरडीहा में स्थति ओडिशा आदर्श विद्यालय के नौवीं कक्षा के स्टूडेंट आयुष कुमार डे के बनाए इस मॉडर्न आइडेंटिटी कार्ड में एक GPS मॉड्यूल है जो स्टूडेंट की लोकेशन को लगातार ट्रैक करता है. हालांकि, यह सामान्य हालात में बैट्री पावर बचाने के लिए इनएक्टिव रहता है. लेकिन इमरजेंसी में, GPS मॉड्यूल एक्टिवेट हो जाता है और रियल-टाइम लोकेशन की जानकारी देता है.
इमरजेंसी में इस स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड को एक्टिवेट करने के लिए, एक SOS या इमरजेंसी पुश बटन दिया गया है. इस बटन को दबाने से GSM/Wi-Fi मॉड्यूल एक्टिवेट हो जाता है, जो तुरंत स्टूडेंट की पहचान और लोकेशन वाला एक इमरजेंसी अलर्ट पेरेंट्स, स्कूल और सबसे पास के पुलिस स्टेशन को भेजता है. स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड का पावर मैनेजमेंट एक बूस्टर कनवर्टर और चार्जिंग मॉड्यूल से होता है, जिससे इसे आसानी से ले जाया जा सकता है.
स्मार्ट आइडेंटिटी कार्ड का उद्देश्य
  • RFID-बेस्ड ऑटोमेटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके मैनुअल अटेंडेंस सिस्टम को खत्म करना
  • GPS का इस्तेमाल करके रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग के जरिये स्टूडेंट की सुरक्षा बढ़ाना
  • GSM या Wi-Fi मॉड्यूल का इस्तेमाल करके इमरजेंसी में पेरेंट्स और टीचर्स को तुरंत अलर्ट देना
  • स्कूल प्रबंधन में मानवीय गलतियों को कम करना और समय बचाना
  • शिक्षा में नई टेक्नोलॉजी का प्रैक्टिकल इस्तेमाल बढ़ाना
  • बच्चों को सेफ्टी और सिक्योरिटी देना, खासकर उन्हें चाइल्ड ट्रैफिकिंग, किडनैपिंग और यौन शोषण जैसे आपराधों से बचाना
  • स्टूडेंट की अटेंडेंस का विश्लेषण करना और उसके हिसाब से बेहतर और कुशल मानव संसाधन विकास करने के उपाय करना
ओडिशा आदर्श विद्यालय, जमीरडीहा के शिक्षक राकेश कुमार नायक ने कहा, "सिर्फ ओडिशा में ही नहीं, बल्कि देश के दूर-दराज के इलाकों के स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. इसके कई कारण हैं.
लेकिन, कई मामलों में, हम देखते हैं कि स्टूडेंट्स घर से स्कूल जाने की बात कहकर निकलते हैं, लेकिन वे स्कूल नहीं पहुंचते.
तभी कुछ अलग करने का आइडिया मन में आया, क्योंकि बच्चे घर से स्कूल जाने की बात कहकर निकलते तो हैं, लेकिन वे कहीं और जाकर ऑनलाइन गेम खेलते हैं या दूसरी गतिविधियों में लग जाते हैं. इसी तरह, उनके साथ कई तरह के हादसे हो रहे हैं.
लड़कियों के साथ अपराध हो रहे हैं. हमारी कोशिश इस स्थिति को बदलने की है. इस ट्रैकिंग आइडेंटिटी कार्ड के जरिये, हम तुरंत स्टूडेंट की लोकेशन जान पाएंगे, और पेरेंट्स भी. ऐसी कई समस्याओं का समाधान करने की हमारी कोशिश है."