20 बागी सांसदों पर TMC का एक्शन तेज, अयोग्यता के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
Kolkata news: तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामने वाले अपने 20 लोकसभा सांसदों के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज करने का फैसला किया है। पार्टी अब इन सांसदों की सदस्यता रद्द कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, अगले 10 दिनों के भीतर शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की जा सकती है।
स्पीकर से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी का रुख सख्त
मामले को लेकर TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। पार्टी की ओर से इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने की मांग दोहराई गई।
अभिषेक बनर्जी का कहना है कि 19 जून को ही 20 सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी गई थीं, लेकिन कई सप्ताह गुजरने के बावजूद न तो संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया गया और न ही सुनवाई की तारीख तय हुई। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय समय में फैसला नहीं हुआ तो पार्टी न्यायिक हस्तक्षेप के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
पांच सप्ताह से लंबित हैं याचिकाएं
TMC का आरोप है कि अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं लंबे समय से लंबित हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इस मुद्दे पर पहले भी लोकसभा अध्यक्ष से कई बार बातचीत की जा चुकी है। 27 जुलाई को भी अभिषेक बनर्जी ने मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सौगत रॉय, कीर्ति आजाद और प्रतिमा मंडल के साथ स्पीकर से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
पार्टी का कहना है कि मॉनसून सत्र के दौरान भी मामले पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया, जिसके चलते अब कानूनी विकल्प अपनाने की तैयारी की जा रही है।
सांसदों की बैठने की व्यवस्था पर भी TMC नाराज
विवाद सिर्फ सदस्यता तक सीमित नहीं है। TMC ने लोकसभा में बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी ने इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है।
अभिषेक बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया है कि जब इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं, तब उन्हें अलग समूह के तौर पर संसदीय गतिविधियों में शामिल किए जाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
सर्वदलीय बैठक में अलग समूह बनाए जाने पर सवाल
TMC की नाराजगी उस समय और बढ़ गई जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में इन बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में आमंत्रित किया। पार्टी का कहना है कि सदस्यता से जुड़े विवाद के निपटारे से पहले इस तरह की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कौन-कौन सांसद हैं बागी गुट में?
TMC के अनुसार बागी सांसदों में पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे भी शामिल हैं। इनमें सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और मिताली बाग समेत अन्य सांसदों के नाम शामिल हैं। ये सभी TMC के चुनाव चिह्न पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे।
वहीं, बागी सांसदों का तर्क है कि उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून में विलय से जुड़े प्रावधान का सहारा लिया है। उनका दावा है कि लोकसभा में TMC के कुल 28 सदस्यों में से दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं।
अब पूरे मामले की अगली दिशा लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और उसके बाद संभावित न्यायिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। TMC के रुख से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को अब संसद से अदालत तक ले जाने की तैयारी में है।