नवरात्रि का छठा दिन आज: मां कात्यायनी की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद!

नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक हैं. सिंह पर सवार मां की चार भुजाएं हैं. उनकी पूजा में लाल या पीले फूल, फल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं. मान्यता है कि मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना शुभ होता है. भक्त इस दिन मां के मंत्र “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” का जाप कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
 

Maa Katyayani Puja: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं।

कौन हैं मां कात्यायनी?

मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी। शास्त्रों के मुताबिक जो भक्त दुर्गा मां की छठी विभूति कात्यायनी की आराधना करते हैं मां की कृपा उन पर सदैव बनी रहती है।  शास्त्रों में माता षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है। इन्हें ही मां कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि के दिन होती है। षष्ठी देवी मां को ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं। छठी माता की पूजा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी मिलता है

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भगवती को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण देवी के इस स्वरूप का नाम कात्यायनी पड़ा।

धार्मिक कथाओं में मां कात्यायनी को दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली देवी बताया गया है। मान्यता है कि उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं और संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसलिए मां कात्यायनी को अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

मां कात्यायनी का स्वरूप कैसा है?

मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल पुष्प सुशोभित होता है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं। मां का यह स्वरूप भक्तों को निर्भयता, आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

नवरात्रि के छठे दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां कात्यायनी का ध्यान करें। मां को लाल या पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्र का जाप कर सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा के दौरान मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक मां की आराधना करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

मां कात्यायनी का पूजा मंत्र

मां कात्यायनी की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

इसके अलावा मां दुर्गा के इस स्वरूप का ध्यान करते हुए भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

मां कात्यायनी को क्या भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल और सात्विक मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

मां कात्यायनी की पूजा का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि मां कात्यायनी की आराधना करने से भक्तों में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां का स्वरूप यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा कर भक्त अपने परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और मंगलमय भविष्य की कामना करते हैं।

जय मां कात्यायनी! जय माता दी!