तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर संसद में घमासान, नेता पद से हटाने और अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी
Kolkata: लोकसभा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद अभिषेक बनर्जी को लेकर संसद के भीतर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में उन्हें नेता पद से हटाने की तैयारी चल रही है और इस संबंध में अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.
संसदीय सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में बदले राजनीतिक समीकरणों और अंदरूनी असहमति के चलते यह कदम उठाया जा सकता है. यदि अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो इससे संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की आशंका है. बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अनौपचारिक बातचीत भी चल रही है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
लोकसभा में पार्टी नेता के रूप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी चल रही है. तृणमूल कांग्रेस के अंदरखाने यह बात चल रही है कि तृणमूल की संसदीय दल की बैठक बुलायी जा सकती है. सूत्रों का कहना है कि कई सांसद बागी गुट के के संपर्क में नहीं हैं. दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का भविष्य क्या होगा, यह देखना बाकी है.
पार्टी में अलग-थलग पड़ चुके हैं अभिषेक
विधानसभा में 58 विधायकों के समर्थन से ऋतब्रता बनर्जी विपक्ष के नेता का पदभार ग्रहण कर चुके हैं. पद पर बैठते ही उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक पर जमकर हमले किए हैं. इस माहौल में लोकसभा में पार्टी विभाजन का नेतृत्व कौन कर रहा है. अटकलें तेज हैं. कहा जा रहा है कि बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार जांच के दायरे में हैं. सुखेन्दुशेखर रॉय पहले ही राज्यसभा में हैं. ममता बनर्जी के धरने में सिर्फ छह लोग शामिल हुए हैं. अभिषेक के अलावा अनुपस्थित लोगों को लेकर भी जमकर चर्चाएं चल रही हैं.
सांसदों की बढ़ रही है ममता से दूरी
पिछले कुछ दिनों में देखा जा रहा है कि पार्टी के मशहूर सांसद ममता से दूरी बढ़ा रहे हैं. कल्याण-काकली विवाद पर दबाव कम नहीं हुआ है. काकली ने खुद कल्याण के खिलाफ सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. उन्होंने ये आरोप लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखे हैं. अब क्या अन्य सांसद भी मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी के खिलाफ काकली के आरोपों से सहमत होंगे. यह सवाल और भी गंभीर होता जा रहा है. इस बीच, सरकार संसद में तृणमूल कांग्रेस को भंग करने के लिए परिसीमन विधेयक को फिर से लाने की तैयारी कर रही है. जेपीसी के विचाराधीन ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक को भी जल्द पारित कराने के लिए सरकार प्रयास में है.
दूसरी ओर, विधानसभा में पार्टी के विभाजन और लोगो के अधिकारों को लेकर अनिश्चितता के संदर्भ में, ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल ने कानूनी सलाह लेना शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार, स्पीकर की भूमिका को ध्यान में रखा जा रहा है. ममता की नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस उचित समय पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगी. तृणमूल नेता ममता बनर्जी के 8 तारीख को दिल्ली में होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होंने की उम्मीद है. उस दौरान वे शीर्ष वकीलों से अलग से बात करेंगी. इस संबंध में महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के बीच लोगो का मामला और नेतृत्व विवाद निर्णायक भूमिका निभाएगा.