HIV, हेपेटाइटिस B-C फैलने का बड़ा कारण असुरक्षित इंजेक्शन, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने सभी अस्पतालों को किया अलर्ट
National: देशभर में चिकित्सा सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें असुरक्षित इंजेक्शनों के उपयोग से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों के बारे में चेतावनी दी गई है. यह एडवाइजरी खासतौर से एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस B और C जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलाव को रोकने के उद्देश्य से जारी की गई है.
आयोग चेतावनी दी गई है कि असुरक्षित इंजेक्शन से एचआईवी, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C फैल सकता है. हालांकि संक्रमण नियंत्रण के नियम और सुरक्षित इंजेक्शन की गाइडलाइन सालों से हैं.
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की एडवाइजरी में असुरक्षित तरीकों के लिए जीरो टॉलरेंस अपनाने को कहा गया है. इसमें सिरिंज या सुइयों का दोबारा इस्तेमाल, बिना सही सावधानी के दवा की शीशियों को शेयर करना और इस्तेमाल की गई सुइयों को दोबारा कैप लगाना शामिल है.
एडवाइजरी में नुकीली चीजों और इंजेक्शन के कचरे को गलत तरीके से फेंकने के खिलाफ भी चेतावनी दी गई है. इसमें यह भी कहा गया है कि सुई लगने से लगी चोटों और संक्रमण के मामलों की तुरंत जांच के लिए रिपोर्ट की जानी चाहिए.
हालांकि एडवाइजरी में पालन न करने पर कोई नई सजा या जुर्माना के बारे में जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन जो मेडिकल कॉलेज एनएमसी के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, उन पर मौजूदा एनएमसी नियमों, अस्पताल मान्यता मानक, बायोमेडिकल वेस्ट कानूनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है.
एक जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ और स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी कमिटी के सदस्य ने कहा कि जिन मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित इंजेक्शन (सेफ इंजेक्शन) और इन्फेक्शन-कंट्रोल के नियमों का उल्लंघन पाया गया, उन्हें नियामक जांच, खराब निरीक्षण रिपोर्ट, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट (जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन) नियमों के तहत कार्रवाई, और लापरवाही की वजह से मरीजों को नुकसान होने पर कानूनी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है.
मशहूर स्वास्थ्य विशेषज्ञ और स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी कमेटी की सदस्य डॉ. सुनीला गर्ग ने मंगलवार को ईटीवी भारत से कहा, "लगातार कमियां संस्थागत मान्यता और विनियामक अनुपालन पर भी असर डाल सकती हैं. चूंकि एडवाइजरी में 'सेफ इंजेक्शन अभ्यास का सख्ती से पालन करना 'मरीज की सुरक्षा जरूरी है' कहा गया है और सिरिंज के दोबारा इस्तेमाल और गलत तरीके से शार्प्स डिस्पोजल के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही गई है, इससे यह इशारा मिलता है कि एनएमसी उम्मीद करता है कि मेडिकल कॉलेज उल्लंघन को गंभीर रोगी-सुरक्षा उल्लंघन के तौर पर देखेंगे."
हाल के डेटा और अंतरराष्ट्रीय और नेशनल सेटिंग्स से सबूतों का हवाला देते हुए, एनएमसी सचिव डॉ. राघव लैंगर द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि, असुरक्षित (अनसेफ इंजेक्शन प्रैक्टिस) से एचआईवी और खून से होने वाले दूसरे संक्रमण फैल सकते हैं.
मुख्य चिंता का विषय: असुरक्षित इंजेक्शनों का इस्तेमाल
कई चिकित्सीय सुविधाओं में इंजेक्शन देने की गलत प्रैक्टिस, एक ही सिरिंज/नiddle का पुन: उपयोग, या स्वच्छता के नियमों का पालन न करना, रोगाणुओं के फैलाव का मुख्य कारण बन सकता है. इससे न केवल आम संक्रमण फैल सकते हैं, बल्कि एचआईवी, हेपेटाइटिस B और C, तथा अन्य रक्तजनित संक्रमणों का जोखिम भी बढ़ जाता है.
इसमें कहा गया, 'मानक संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण अभ्यास' का सख्ती से पालन करके ऐसी घटनाओं को पूरी तरह से रोका जा सकता है. एडवाइजरी में कहा गया है कि हाथ की सफाई, सिर्फ स्टेराइल, सिंगल यूज सुई और सिरिंज का इस्तेमाल करके सुरक्षित इंजेक्शन लगाने के जरूरी तरीकों को लागू करना और हर हाल में दोबारा इस्तेमाल पर सख्त रोक जैसे उपायों को सभी जगहों पर लागू करने की जरूरत है.
इसमें कहा गया है, "सभी नुकीली चीजों और इंजेक्शन से जुड़े कचरे को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के हिसाब से अलग करके निपटान करना होगा." बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के तहत, इस्तेमाल की गई सुइयों और नुकीली चीजों को पंचर-प्रूफ कंटेनर में इकट्ठा किया जाना चाहिए और आखिरी निपटान से पहले ट्रीट किया जाना चाहिए ताकि अचानक लगने वाली चोटों और संक्रमण के खतरे को रोका जा सके.
एनएमसी ने सभी मेडिकल कॉलेजों से धीरे-धीरे सेफ्टी-इंजीनियर्ड ऑटो डिसेबल सिरिंज अपनाने को कहा है. इसमें कहा गया है, 'हेल्थकेयर वर्करों को योग्यता आकलन के साथ समय-समय पर ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.
भारत में खून से होने वाले संक्रमण का बहुत ज्यादा बोझ है. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, देश में लगभग 24 लाख (2.4 मिलियन) लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं. देश में लगभग 40 मिलियन (4 करोड़) लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस B इन्फेक्शन से पीड़ित हैं और लगभग 6 से 12 मिलियन लोग हेपेटाइटिस C से संक्रमित हैं.
डॉ. गर्ग ने कहा, "असुरक्षित मेडिकल तरीके, जिसमें सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल और नुकीली चीजों का गलत तरीके से फेंकना शामिल है, बीमारी को फैलने में मुख्य जोखिम का कारण बना हुआ है. एनएमसी की नई एडवाइजरी से देश के चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में संक्रमण नियंत्रण मानक को मजबूत करने और मरीजों की सुरक्षा के उपायों को मजबूत करने की उम्मीद है.
डॉ. गर्ग ने कहा, "राष्ट्रीय दिशानिर्देश का बेहतर पालन, रेगुलर ऑडिट और स्टाफ ट्रेनिंग के साथ मिलकर, हेल्थकेयर से जुड़े इन्फेक्शन के रिस्क को काफी कम कर सकता है और हेल्थकेयर सेटिंग्स में खून से होने वाली बीमारियों को फैलने से रोकने में मदद कर सकता है."