यूपी में 2,901 करोड़ से ज्यादा का औद्योगिक निवेश, 8 मेगा परियोजनाओं को योगी कैबिनेट की मंजूरी

 

UP News: उत्तर प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में योगी सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आठ मेगा श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने की मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में कुल 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता साफ होगा।

यह मंजूरी उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत दी गई है। पात्रता के अनुसार संबंधित कंपनियों को नेट एसजीएसटी और पूंजीगत सब्सिडी समेत नीति आधारित प्रोत्साहन मिलेंगे। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

सात जिलों में आएगा निवेश

कैबिनेट से मंजूरी पाने वाली परियोजनाएं प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रस्तावित हैं। इनमें गौतमबुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव शामिल हैं।

प्रस्तावित निवेश में सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड गौतमबुद्ध नगर में 605.37 करोड़ रुपये, शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड हमीरपुर में 297.30 करोड़ रुपये और साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड हाथरस में 225 करोड़ रुपये लगाएगी।

इसी तरह वृन्दावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड बाराबंकी में 436.12 करोड़ रुपये, जुआरी एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड लखीमपुर खीरी में 294.72 करोड़ रुपये और पसवारा पेपर्स लिमिटेड हाथरस में 315 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है।

इसके अलावा सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड मथुरा में 363.94 करोड़ रुपये और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड उन्नाव में 363.52 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

पहले समिति ने की थी सिफारिश

इन निवेश प्रस्तावों पर 4 मई 2026 को हुई उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की बैठक में विचार किया गया था। समिति ने परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए कैबिनेट से मंजूरी लेने की सिफारिश की थी। अब मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

निवेश के साथ रोजगार को भी रफ्तार

सरकार के इस फैसले का असर केवल निवेश तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और उनके संचालन से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ सप्लाई चेन, परिवहन, सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

खास तौर पर जिन जिलों में ये परियोजनाएं स्थापित होंगी, वहां स्थानीय कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार की औद्योगिक निवेश नीति के तहत दिए जा रहे प्रोत्साहनों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना और उत्तर प्रदेश को बड़े औद्योगिक निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब 2,901.97 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इन आठ मेगा परियोजनाओं के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।