UP News: यूपी में पंचायत प्रतिनिधियों को बड़ा तोहफा! प्रधानों के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख भी बन सकते हैं प्रशासक

 

Lucknow, UP News: उत्तर प्रदेश सरकार पंचायत प्रतिनिधियों को एक और बड़ी राहत देने की तैयारी में है। ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक का दायित्व सौंपने पर विचार किया जा रहा है। पंचायती राज विभाग इस प्रस्ताव पर गंभीरता से मंथन कर रहा है और जल्द ही इस संबंध में निर्णय लिया जा सकता है।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव होने तक प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें प्रशासक नियुक्त करने की योजना पर काम चल रहा है। ब्लॉक प्रमुख संघ पहले ही इस मांग को सरकार के समक्ष रख चुका है।

सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज निदेशालय ने इस संबंध में प्रस्ताव विभाग को भेज दिया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले प्रदेश सरकार ने ग्राम प्रधानों की मांग स्वीकार करते हुए उन्हें प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया था। 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही शासनादेश जारी कर 57,694 ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। यह उत्तर प्रदेश में पहली बार हुआ जब निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही पंचायतों का प्रशासक बनाया गया।

सरकारी व्यवस्था के अनुसार, प्रशासक के रूप में ग्राम प्रधान केवल दैनिक और नियमित कार्यों का संचालन कर सकते हैं। उन्हें किसी भी प्रकार के नीतिगत या बड़े वित्तीय निर्णय लेने की अनुमति नहीं है। यह व्यवस्था छह महीने या नई पंचायत के गठन और पहली बैठक तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।

अब इसी मॉडल को जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों पर लागू करने की संभावना जताई जा रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पंचायत चुनाव होने तक दोनों पदों पर कार्यरत जनप्रतिनिधि प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में देरी हो सकती है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक बनाकर सरकार प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी संतुष्ट रखने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।