UP News: राम मंदिर दान विवाद पर गरमाई सियासत- अखिलेश यादव ने SIT जांच पर उठाए सवाल, ट्रस्ट पर विपक्ष का निशाना

 
UP News: अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है, जहां प्रशासनिक अधिकारी संतों और मंदिर से जुड़े लोगों की जांच करेंगे।

आगरा में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि यदि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसे सार्वजनिक विवाद का विषय बनाने के बजाय जिम्मेदार लोगों को स्वयं आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों और संतों की जांच को लेकर समाज में गलत संदेश जा सकता है।

सपा प्रमुख ने तंज भरे अंदाज में कहा कि यदि चढ़ावे में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसे वापस कर देना चाहिए। उन्होंने इसे आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा संवेदनशील मामला बताते हुए कहा कि मंदिरों और संतों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। यह कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उठाया गया है। बताया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी, ताकि तथ्यों को सामने लाया जा सके।

गठित एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। जांच दल मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों और सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की पड़ताल करेगा।

वहीं, अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित जांच दल पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनकी मांग है कि मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में गठित किसी स्वतंत्र समिति से कराई जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

सांसद ने यह भी कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो जांच से पहले ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी आवश्यक है।

राम मंदिर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल से जुड़े इस विवाद पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सरकार और ट्रस्ट जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने की बात कह रहे हैं, वहीं विपक्ष इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।