UP Weather Update: चक्रवात Murasu का यूपी में दिखेगा असर? 3 नवंबर को बारिश का अलर्ट या साफ रहेगा मौसम!

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' को लेकर मौसम विभाग की नजर बनी हुई है. इसके प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है. IMD के अनुसार, तूफान के 2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के तट से टकराने का अनुमान है. हालांकि, उत्तर प्रदेश में 3 नवंबर को बारिश होने की जिलेवार आधिकारिक चेतावनी की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.
 

UP Weather Update:  बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान मुरासु का असर उत्तर प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है। आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहे इस तूफान के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम बदलने की संभावना जताई गई है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, 3 नवंबर को पूर्वांचल के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। यह स्थिति 4 नवंबर तक बनी रह सकती है। बारिश की आशंका ने धान की कटाई और खेतों में तैयार फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

पूर्वी यूपी में बारिश की संभावना, पश्चिमी हिस्से में कम असर

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 3 नवंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने के आसार हैं। पश्चिमी यूपी की तुलना में पूर्वांचल में मौसम में बदलाव की संभावना अधिक बताई जा रही है। हालांकि, पूरे प्रदेश में भारी बारिश या तेज आंधी को लेकर किसी व्यापक चेतावनी की पुष्टि नहीं है। बारिश की स्थिति तूफान की दिशा और उसके प्रभाव पर निर्भर करेगी।

आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा मुरासु

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका है। पूर्वानुमान के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के तट पर हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है।

हालांकि, तूफान के तटीय इलाकों में संभावित प्रभाव और उत्तर प्रदेश के मौसम की स्थिति अलग-अलग होगी। आंध्र प्रदेश के लिए बताई गई हवा की रफ्तार को यूपी पर लागू नहीं माना जा सकता।

धान की फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता

पूर्वांचल में इस समय धान की कटाई और मड़ाई का काम चल रहा है। ऐसे में अगर बारिश होती है तो खेतों में खड़ी फसल और कटाई के बाद खुले में रखी उपज प्रभावित हो सकती है। धान भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब होने और किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका रहती है।

किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर कटाई और मड़ाई की योजना बनाएं। कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था करें।

4 नवंबर तक भी बदल सकता है मौसम का मिजाज

पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4 नवंबर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि बारिश किन जिलों में और कितनी मात्रा में होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी के लिए मौसम विभाग के जिला स्तरीय बुलेटिन पर नजर रखना जरूरी है। फिलहाल प्रदेश में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी की पुष्टि नहीं है।

बारिश और गरज-चमक के दौरान बरतें सावधानी

मौसम में बदलाव के दौरान किसानों और आम लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट देखते रहना चाहिए। अगर कहीं गरज-चमक या बिजली गिरने की स्थिति बनती है तो खुले मैदान, खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। मौसम विभाग और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन करना भी जरूरी है।