यूपी की कृषि शक्ति और जापानी तकनीक का संगम, दुनिया का बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनाने का लक्ष्य

 

 

UP News: उत्तर प्रदेश अब अपनी कृषि क्षमता को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़कर फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जापानी निवेशकों से उत्तर प्रदेश में निवेश की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश की कृषि संपदा और जापान की अत्याधुनिक तकनीक का मेल इसे दुनिया के बड़े फूड प्रोसेसिंग हब में बदल सकता है।

सेक्टोरल कार्यक्रम ‘फ्रॉम फॉर्म गेट टू ग्लोबल प्लेट’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास उपजाऊ जमीन, पर्याप्त जल संसाधन, मेहनती किसान और बड़ा युवा कार्यबल है। दूसरी ओर जापान के पास तकनीक, गुणवत्ता और आधुनिक प्रसंस्करण की विशेषज्ञता है। दोनों की साझेदारी से प्रदेश के कृषि उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नई पहचान मिल सकती है।

उत्पादन से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट पर जोर

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए सरकार का फोकस केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण नीति को और अधिक आकर्षक बनाया गया है। सरकार की ओर से प्रसंस्करण इकाइयों को कैपिटल सब्सिडी, मंडी शुल्क में राहत और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। महिलाओं के नेतृत्व में स्थापित होने वाली इकाइयों को सोलर पावर पर भी विशेष सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

सरकार की योजना ब्लॉक और तहसील स्तर पर आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करने की है। इसके लिए लैंड बैंक, बिजली आपूर्ति और एक्सप्रेस-वे व लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी निवेश के लिए अनुकूल आधार बताया गया।

‘यूपी का उत्पाद दुनिया की हर डाइनिंग टेबल तक पहुंचे’

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि दुनिया की किसी भी ऐसी डाइनिंग टेबल की कल्पना न हो, जहां उत्तर प्रदेश का कोई कृषि या खाद्य उत्पाद मौजूद न हो। उन्होंने जापानी उद्यमियों को प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठाने का आमंत्रण दिया।

उन्होंने काला नमक चावल जैसे पारंपरिक उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई कृषि उत्पाद अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। इन उत्पादों को आधुनिक पैकेजिंग, प्रोसेसिंग और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग के जरिए वैश्विक ब्रांड में बदला जा सकता है।

निवेशकों को सुरक्षा और सिंगल विंडो व्यवस्था का भरोसा

जापानी निवेशकों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और पारदर्शी सिंगल-विंडो सिस्टम का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और जेवर जैसे एयरपोर्ट तथा प्रदेश का विस्तृत एक्सप्रेस-वे नेटवर्क निवेश और निर्यात के लिए मजबूत कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। ऐसे में कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और महिला उद्यमिता को भी नई गति मिल सकती है।

भारत-जापान रिश्तों में आर्थिक सहयोग की नई कड़ी

कार्यक्रम में भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और कौशल विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कृषि क्षमता, औद्योगिक आधार और मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा करते हैं।

किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भी भारतीय बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप जापानी कंपनियों के लिए स्थानीय विनिर्माण और निर्यात की संभावनाओं पर बात रखी। उन्होंने भारत को पड़ोसी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए संभावित निर्यात केंद्र बताया।

कार्यक्रम में गोल्डी ग्रुप के निदेशक सुदीप गोयनका, अमूल (बनास डेयरी) के यूपी ऑपरेशंस प्रमुख दिनेश कुमार चौधरी सहित अन्य उद्योग प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

कुल मिलाकर, यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट ने कृषि उत्पादन को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में नई संभावनाओं को सामने रखा। सरकार की कोशिश है कि किसानों की उपज की वैल्यू बढ़े, स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो और ‘यूपी का उत्पाद’ दुनिया के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए।