GeM पर यूपी का जलवा, तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित; सरकारी खरीद में MSME की हिस्सेदारी 59% पहुंची

 

 

UP News: उत्तर प्रदेश ने सरकारी खरीद में पारदर्शिता और छोटे कारोबारियों को अवसर देने के मामले में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए संबंधित अधिकारियों और विभाग को बधाई दी।

मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल और स्टेट GeM नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर GeM पर प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी दी।

GeM से यूपी ने की ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की खरीद

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश सरकार अब तक GeM के जरिए ₹1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद कर चुकी है। इसमें ₹55,972 करोड़ से ज्यादा की खरीद सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSE) से हुई है।

सरकार का कहना है कि GeM ने सरकारी खरीद की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ छोटे कारोबारियों को भी सरकारी बाजार तक पहुंचने का रास्ता दिया है।

तीन कैटेगरी में मिला राष्ट्रीय सम्मान

नई दिल्ली के भारत मंडपम में GeM के 10वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए तीन पुरस्कार दिए गए।

प्रदेश को मिले सम्मान में शामिल हैं—

• GeM ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड
• हाईएस्ट GeM प्रोक्योरमेंट वैल्यू अवार्ड
• बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ये पुरस्कार प्रदान किए। उत्तर प्रदेश की ओर से एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने पुरस्कार प्राप्त किए।

चार साल में 43% से बढ़कर 59% हुई MSME की हिस्सेदारी

GeM पर सरकारी खरीद में छोटे उद्यमों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल खरीद में MSE की हिस्सेदारी जहां 43 प्रतिशत थी, वहीं 2026-27 में जुलाई तक यह बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो—

• 2023-24: ₹20,248 करोड़ की कुल खरीद, MSE से ₹8,771 करोड़
• 2024-25: ₹16,830 करोड़ की कुल खरीद, MSE से ₹8,952 करोड़
• 2025-26: ₹22,337 करोड़ की कुल खरीद, MSE से ₹12,181 करोड़
• 2026-27 में जुलाई तक: ₹7,235 करोड़ की कुल खरीद, MSE से ₹4,253 करोड़

खास बात यह है कि MSE से होने वाली खरीद में उत्तर प्रदेश के स्थानीय उद्यमों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। यह हिस्सेदारी 2023-24 में 76 प्रतिशत थी, जो 2026-27 में जुलाई तक बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई।

महिला और SC/ST उद्यमियों को भी मिला बड़ा बाजार

GeM ने छोटे कारोबारियों के साथ महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए भी सरकारी बाजार में पहुंच आसान की है।

चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के MSE को GeM के माध्यम से कुल ₹16,953 करोड़ का कारोबार मिला। इसमें—

• महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़
• SC/ST उद्यमियों को ₹255 करोड़
• स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़

का कारोबार मिला।

इससे पहले 2025-26 में यूपी के MSE को GeM के जरिए ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों की हिस्सेदारी ₹4,755 करोड़, SC/ST उद्यमियों की ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स की ₹3,203 करोड़ रही।

समावेशी खरीद नीति का दिख रहा असर

स्टेट GeM नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी के मुताबिक छोटे उद्यमों को सरकारी खरीद में ज्यादा अवसर देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 नवंबर 2024 को समावेशी सरकारी खरीद से जुड़ा शासनादेश जारी किया था।

इसके बाद GeM पर प्रदेश के MSE की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार का जोर स्थानीय कारोबारियों के साथ महिला उद्यमियों, SC/ST उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ने पर है।

इसका सीधा फायदा स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को बड़ा बाजार मिलने के रूप में सामने आ रहा है। इससे उद्यमिता के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड से सरकार को मिले ₹32.54 करोड़

GeM का इस्तेमाल केवल सरकारी सामान और सेवाओं की खरीद तक सीमित नहीं है। सरकारी परिसंपत्तियों की नीलामी में भी डिजिटल और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से बेहतर मूल्य हासिल किया जा रहा है।

कानपुर में उद्योग निदेशालय की ओर से 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक आस्थानों के 34 प्लॉट और शेड की 99 साल की लीज के लिए नीलामी की गई। इनका आरक्षित मूल्य करीब ₹6.39 करोड़ था।

प्रतिस्पर्धी बोली के बाद इनका बिक्री मूल्य बढ़कर ₹32.54 करोड़ पहुंच गया। यानी सरकार को आरक्षित मूल्य की तुलना में ₹26.15 करोड़ की अतिरिक्त आय हुई। बिक्री मूल्य आरक्षित मूल्य से करीब 409 प्रतिशत अधिक रहा।

यह उदाहरण दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और पारदर्शी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए सरकारी खरीद के साथ-साथ सरकारी परिसंपत्तियों का भी बेहतर आर्थिक मूल्य हासिल किया जा सकता है।