यूपी में राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 10वीं सीट के लिए बढ़ेगा सियासी घमासान
UP News: उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में उच्च सदनों की सीटों को लेकर चुनावी हलचल बढ़ने वाली है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 10 सीटों के साथ-साथ विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव कार्यक्रम का भी ऐलान कर दिया है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि विधान परिषद की 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे।
10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान
यूपी कोटे की राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव होगा। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इनमें भाजपा के आठ, समाजवादी पार्टी का एक और बहुजन समाज पार्टी का एक सदस्य शामिल है। डॉ. दिनेश शर्मा की सीट उनके इस्तीफे के बाद पहले ही खाली हो चुकी है। शर्मा को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया था।
इन 10 सीटों पर कार्यकाल पूरा होने वाले प्रमुख सांसदों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, गीता शाक्य, सीमा द्विवेदी, डॉ. दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बृजलाल, सपा के प्रोफेसर रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी लाल गौतम शामिल हैं।
10वीं सीट पर दिलचस्प होगा मुकाबला
राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं और सीटों का गणित विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या पर निर्भर करता है। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक भाजपा के 256 विधायक हैं। उसके सहयोगी दलों अपना दल (सोनेलाल), आरएलडी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी को जोड़ने पर एनडीए के पास 289 विधायक हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के 101 विधायक हैं। विधानसभा में छह सीटें फिलहाल रिक्त हैं।
इस गणित में एनडीए के लिए कई सीटों पर स्थिति मजबूत है, जबकि सपा भी दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या रखती है। ऐसे में 10वीं सीट के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन पर विशेष नजर रहेगी। निर्दलीय या छोटे दलों के विधायकों की भूमिका भी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
बसपा के सामने इस चुनाव में अपना राज्यसभा प्रतिनिधित्व बरकरार रखने की चुनौती है। पार्टी के पास फिलहाल विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में मौजूदा सदन के आंकड़ों के आधार पर उसके लिए अपने दम पर राज्यसभा सीट हासिल करना संभव नहीं दिखता।
2020 में अलग था समीकरण
साल 2020 में भी बसपा के पास अपने दम पर राज्यसभा सदस्य चुनने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। उस समय भाजपा ने 10 में से आठ सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे थे। इसके चलते बसपा के रामजी लाल गौतम राज्यसभा पहुंच सके थे। इस बार विधानसभा का मौजूदा गणित और दलों की संख्या पहले से अलग है, इसलिए मुकाबले की तस्वीर भी अलग रहने की संभावना है।
विधान परिषद की 11 सीटों पर भी चुनाव
राज्यसभा चुनाव के कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान होगा। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना कराई जाएगी। चुनाव की पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी की जाएगी।
इस तरह अक्टूबर में उत्तर प्रदेश में राज्यसभा और विधान परिषद—दोनों उच्च सदनों के लिए चुनाव होंगे। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा का दलगत गणित अहम रहेगा, जबकि विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।