West Bengal Education Update: 2030 तक पारंपरिक B.Ed कोर्स होगा बंद, नए सत्र से लागू होगा Integrated Teacher Education Programme
Kolkata: पश्चिम बंगाल में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप राज्य में पारंपरिक दो वर्षीय बी.एड. (B.Ed.) पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके स्थान पर चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) लागू किया जाएगा. इसकी शुरुआत अगले शैक्षणिक सत्र से करने की योजना है, जबकि वर्ष 2030 तक पारंपरिक बी.एड. को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा.
राज्य के बाबा साहेब अंबेडकर एजुकेशन यूनिवर्सिटी (BSAEU) ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने से पहले संबद्ध कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से चर्चा की जाएगी. इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग की मंजूरी मिलने पर इसे लागू किया जाएगा. शुरुआत में नया और पुराना दोनों पाठ्यक्रम साथ-साथ चलेंगे, लेकिन 2030 तक पूरी तरह इंटीग्रेटेड मॉडल पर संक्रमण का लक्ष्य रखा गया है.
क्या है इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP)?
ITEP एक चार वर्षीय समेकित पाठ्यक्रम है, जिसमें छात्र-छात्राएं 12वीं के बाद सीधे प्रवेश लेकर स्नातक डिग्री और बी.एड. दोनों की पढ़ाई एक साथ पूरी करेंगे. इस दौरान उन्हें विषय आधारित शिक्षा के साथ शिक्षण पद्धति, कक्षा प्रबंधन, शैक्षणिक मनोविज्ञान और स्कूल इंटर्नशिप का प्रशिक्षण भी मिलेगा. कोर्स पूरा करने के बाद अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने के साथ-साथ उच्च शिक्षा के लिए भी पात्र होंगे.
NEP 2020 के अनुरूप होगा बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट किया गया है कि 2030 से शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बी.एड. होगी. इसी नीति के अनुरूप राज्यों में शिक्षक शिक्षा संस्थानों को बहुविषयक संस्थानों में बदलने और इंटीग्रेटेड शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया जारी है. पश्चिम बंगाल भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है.
छात्रों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों को स्नातक के बाद अलग से दो वर्षीय बी.एड. करने की आवश्यकता नहीं होगी. इससे समय की बचत होगी, पढ़ाई अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित बनेगी तथा शिक्षक बनने की प्रक्रिया भी अधिक सुव्यवस्थित होगी. सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित शिक्षक तैयार किए जा सकेंगे.