‘लिफाफा’ किसका? चुनाव चिह्न को लेकर ISF ने ECI के फैसले को दी चुनौती

Nandigram Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ‘लिफाफा’ चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दिया गया है.
 

Kolkata: पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत ‘लिफाफा’ (Envelope) चुनाव चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) को आवंटित किया गया है। ISF ने मांग की है कि आगामी उपचुनाव में ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए।

ISF ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल

ISF की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दलील दी कि पार्टी पिछले चुनावों में ‘लिफाफा’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ती रही है और मौजूदा उपचुनाव में भी मैदान में है। ऐसे में उसी चुनाव में यह चिह्न किसी दूसरे दल को आवंटित करने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाया।

ISF का कहना है कि ‘लिफाफा’ चिह्न के साथ उसकी पहचान बन चुकी है और चुनाव के ठीक पहले प्रतीक बदलने से उसके उम्मीदवारों के प्रचार पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने अदालत से यह भी कहा कि यदि ‘लिफाफा’ चिह्न ISF को नहीं दिया जा सकता, तो इसे दूसरे दल को भी आवंटित न किया जाए और संबंधित पक्ष को कोई अन्य चिह्न दिया जाए।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने ISF की दलील का विरोध करते हुए कहा कि ISF एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और ऐसे दल किसी चुनाव चिह्न पर स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकते। आयोग के अनुसार ‘लिफाफा’ चिह्न ISF को पहले अस्थायी तौर पर आवंटित किया गया था और वह इसका इस्तेमाल दो चुनावों में कर चुकी है। इसके बाद आयोग ने इसे दोबारा आवंटित किया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस उपचुनाव के लिए ISF को अब ‘अलमारी’ (Almirah) चुनाव चिह्न आवंटित किया है, जबकि ‘लिफाफा’ चिह्न डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दिया गया है।

6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद दोनों सीटों पर चुनाव चिह्नों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियों पर भी असर पड़ा है। ISF ने नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव में मूल ‘फूल और घास’ चिह्न और ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। इसके बाद ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चिह्न, जबकि ऋतब्रत बनर्जी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया।

हाईकोर्ट ने सुनवाई 24 सितंबर तक बढ़ाई

23 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए समय दिया। अदालत ने मामले को 24 सितंबर को फिर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में ‘लिफाफा’ चिह्न के आवंटन और ISF की मांग पर अदालत के रुख पर नजर रहेगी।

चुनाव से पहले बढ़ा Symbol War

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों को लेकर यह विवाद पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया में एक और कानूनी मोड़ है। एक तरफ TMC के दो गुटों के नाम और चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है, वहीं ISF ने अपने पुराने चुनाव चिह्न के आवंटन को अदालत में चुनौती दी है। ऐसे में 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्नों को लेकर अदालत और चुनाव आयोग के फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे।