राम मंदिर CEO जितेंद्र मिश्रा का फर्जी वीडियो अभिजीत दीपके ने क्यों किया शेयर? अब निकला पाकिस्तान कनेक्‍शन तो उठ रहे सवाल

 

New Delhi: राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा के नाम से सोशल मीडिया पर एक डांस वीडियो तेजी से वायरल हुआ. दावा किया गया कि वीडियो में मिश्रा फिल्मी गाने 'जमाल कुडू' पर डांस कर रहे हैं. हालांकि, फैक्ट-चेक में यह दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ. वीडियो में दिख रहे व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है. यह वीडियो नवंबर 2025 का बताया जा रहा है, जबकि मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक सीईओ 2 सितंबर 2026 को नियुक्त किया गया है. 

इसी फेक वीडियो को 6 सितंबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपने एक्स अकाउंट पर शेयर कर दिया. हालांकि. बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है. इसके बाद सोशल मीडिया पर दीपके की इस पोस्ट को लेकर तीखे सवाल उठने लगे और कुछ यूजर्स ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की. सबने सवाल उठाए कि आखिर दीपके ने वीडियो शेयर करते समय उसकी पुष्टि क्यों नहीं की और इसके पीछे के सियासी मायने क्या हैं. आइए विस्तार से समझते हैं पूरी बात.

राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO बनाए गए जितेंद्र मिश्रा इन दिनों चर्चा में हैं. उनकी नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति फिल्मी गाने 'जमाल कुडू' पर डांस करता नजर आ रहा है और उसके सिर पर बोतल या गिलास जैसी वस्तु रखी हुई है. इसे इस झूठे दावे के साथ फैलाया गया कि इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा हैं. लेकिन जब इसका फैक्ट-चेक किया गया, तो यह दावा बेबुनियाद निकला.

विवाद तब और गहरा गया जब CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने 6 सितंबर को दोपहर करीब 2:31 बजे यही वीडियो अपने X अकाउंट से शेयर कर दिया. इससे पहले भी यह क्लिप कुछ अन्य सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की जा चुकी थी. दीपके ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में वह क्या करता है, इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने आगे यह भी लिखा कि यदि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट का CEO नहीं होता, तो धर्म के 'ठेकेदार' उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई.

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि यह वीडियो सबसे पहले 3 सितंबर को पाकिस्तान स्थित फेसबुक पेज 'Defence Watch' पर अपलोड किया गया था, जहां से यह भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचा. फैक्ट-चेक के दौरान वीडियो में दिख रहे व्यक्ति और जितेंद्र मिश्रा की तस्वीरों की आपस में तुलना की गई, जिसमें दोनों के चेहरे और शारीरिक बनावट में साफ अंतर पाया गया. यानी वीडियो अपनी जगह असली हो सकता है, लेकिन उसमें दिख रहे शख्स को जितेंद्र मिश्रा बताना सरासर गलत था.

अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब जब वीडियो जितेंद्र मिश्रा का था ही नहीं, तो दीपके ने बिना पुष्टि के इसे शेयर क्यों किया? क्या सोशल मीडिया पर राजनीतिक संदेश को तेजी से आगे बढ़ाने की होड़ में तथ्य की जांच को दरकिनार कर दिया गया? इन गंभीर सवालों के जवाब अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं. वीडियो की गलत पहचान उजागर होने के बाद सोशल मीडिया पर दीपके की चौतरफा आलोचना हुई और हो रही है. कई यूजर्स ने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश तथा अयोध्या पुलिस से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

बढ़ते विवाद के बाद अभिजीत दीपके ने अपनी सफाई दी. उनका कहना है कि उन्हें अब यह जानकारी दी गई है कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है. उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी उसका अपना निजी मामला है. उनके मुताबिक, उनका मुख्य मुद्दा उस व्यक्ति की निजी पसंद नहीं, बल्कि कथित 'हिपोक्रेसी' को उजागर करना था.

इस पूरे घटनाक्रम में CJP के राजनीतिक तौर-तरीकों को समझना भी जरूरी है. कॉकरोच जनता पार्टी की पहचान मुख्य रूप से एक सोशल मीडिया-आधारित राजनीतिक अभियान के रूप में बनी है. अभिजीत दीपके लगातार युवाओं, शिक्षा, व्यवस्था और जवाबदेही जैसे मुद्दों को सोशल मीडिया के माध्यम से उठाते रहे हैं. ऐसे में किसी बड़े और संवेदनशील धार्मिक संस्थान के CEO से जुड़ा कोई भी विवादित वीडियो शेयर करना स्वाभाविक रूप से भारी चर्चा का विषय बन जाता है. राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक विषय नहीं बल्कि भारतीय राजनीति का बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली केंद्र है. यही वजह है कि जितेंद्र मिश्रा से जुड़ा यह विवाद एक आम सोशल मीडिया पोस्ट से कहीं अधिक बड़ा असर पैदा कर रहा है.

इसके पीछे की राजनीतिक रणनीति क्या है?

राजनीति में सुर्खियों में बने रहने के लिए अक्सर नए-नए तरीके अपनाए जाते हैं. ताजा विवाद इस बात की बात की और पुष्टि करता है कि कैसे एजेंडा सेट करने के लिए भ्रामक या फर्जी वीडियो का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे एक सोचा-सझा सियासी एजेंडा हो सकता है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ and क्षेत्र ट्रस्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी 62 वर्षीय रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या मंदिर के कामकाज की कमान सौंपी है. इतने प्रतिष्ठित और संवेदनशील पद पर नियुक्ति के ठीक तुरंत बाद इस तरह का भ्रामक वीडियो वायरल करना जनता के बीच एक खास नैरेटिव गढ़ने की सोची-समझी चाल प्रतीत होता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जो संगठन समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की दुहाई देता है, जब वही बिना किसी पड़ताल के सोशल मीडिया पर इस तरह के असत्य वीडियो फैलाने लगे, तो उसकी मंशा पर सवाल उठना पूरी तरह स्वाभाविक है. इस सियासी खेल की असल परतें समय के साथ ही पूरी तरह साफ हो पाएँगी, फिलहाल यह मामला गर्माया हुआ है.