PM मोदी ने क्यों कहा- ‘उन्हें धन्यवाद कहिए’? बेटियों की सुरक्षा पर हुई खास चर्चा

उत्तर प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की. एक युवती से बातचीत के दौरान उसकी बात सुनकर पीएम मोदी ने कहा कि इसके लिए योगी जी को धन्यवाद कहिए. इस टिप्पणी के बाद महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयासों की चर्चा तेज हो गई है.

 

Varanasi:  उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महिला प्रशिक्षुओं के बीच हुई बातचीत के दौरान महिला सुरक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे अहम मुद्दे सामने आए। मिर्जामुराद स्थित अरविंद मिल्स की इकाई के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने वहां प्रशिक्षण ले रही 24 महिला प्रशिक्षुओं से संवाद किया। इस दौरान गोरखपुर की युवती खुशबू पाल ने उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपना अनुभव साझा किया। उनकी बात सुनकर प्रधानमंत्री ने कहा, “इसके लिए योगी जी को धन्यवाद कहिए।”

इस संवाद में प्रधानमंत्री ने महिलाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि आगे चलकर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी काम करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

‘अब लड़कियां अकेले बाहर जाकर नौकरी कर सकती हैं’

महिला प्रशिक्षुओं से बातचीत के दौरान गोरखपुर की खुशबू पाल ने बताया कि वह पिछले एक महीने से प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके अनुसार, जब वह घर जाती हैं तो दूसरी लड़कियां भी उनके साथ आकर प्रशिक्षण लेने की इच्छा जताती हैं। उनके माता-पिता भी बेटियों को बाहर भेजने के लिए तैयार हैं।

खुशबू ने कहा कि अब लड़कियां उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगह जाकर नौकरी कर सकती हैं और अकेले रह सकती हैं। उन्हें पहले जैसा डर महसूस नहीं होता। युवती की बात सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने महिला सुरक्षा के संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद देने की बात कही।

PM मोदी का संदेश: नौकरी करने के साथ रोजगार भी पैदा करें

प्रधानमंत्री ने महिला प्रशिक्षुओं को अपने कौशल और रचनात्मकता का लगातार विकास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद केवल नौकरी हासिल करने तक ही सीमित न रहें, बल्कि ऐसी स्थिति तक पहुंचें, जहां वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें।

पीएम मोदी ने युवतियों को नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कपड़ों के नए डिजाइन तैयार करने जैसे रचनात्मक प्रयासों का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने काम के साथ नए प्रयोग करने से आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

बनारस के गारमेंट को विदेशों तक पहुंचाने की उम्मीद

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने गोरखपुर, वाराणसी और अहमदाबाद से आई युवतियों से उनके भविष्य के सपनों के बारे में भी पूछा। किसी ने मैनेजर बनने की इच्छा जताई, तो किसी ने अपना कारोबार शुरू करने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने युवतियों को नौकरी के साथ स्टार्टअप और उद्यमिता के विकल्पों पर भी विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बनारस के वस्त्र उद्योग की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यहां के गारमेंट को भूटान और जापान जैसे देशों तक पहुंचाने की दिशा में अवसर हैं।

वाराणसी की आरती देवी से बातचीत में प्रधानमंत्री ने शहर में हो रहे बदलावों के बारे में पूछा। आरती ने विकास कार्यों का उल्लेख किया, तो पीएम ने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

सहज बातचीत और चरखे की थीम ने खींचा ध्यान

महिला प्रशिक्षुओं से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री का सहज अंदाज भी देखने को मिला। एक महिला कर्मचारी से कमल का अर्थ पूछने पर उसने इसे चुनाव चिह्न बताया। इस पर प्रधानमंत्री ने अरविंद और कमल के अर्थ का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी।

प्रधानमंत्री ने यह भी पूछा कि रविवार को कार्यक्रम के लिए बुलाए जाने पर क्या उन्हें बुरा लगा। महिला प्रशिक्षुओं ने जवाब दिया कि इतनी बड़ी फैक्ट्री में काम करने और प्रशिक्षण का अवसर मिलना उनके लिए खुशी की बात है।

कार्यक्रम में बांसुरी वादक छात्र सत्यम चक्रवाल से भी प्रधानमंत्री ने बातचीत की। वहीं, फैक्ट्री परिसर में कपड़ों के विभिन्न ब्रांड की प्रदर्शनी लगाई गई थी। मुख्य द्वार पर ‘चरखे की डोर, भविष्य की ओर’ थीम पर आधारित चरखे की आकृति और होर्डिंग भी लगाए गए थे, जिन्हें प्रधानमंत्री कुछ देर रुककर देखते नजर आए।

महिला सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक, संवाद में कई मुद्दे

वाराणसी में हुआ यह संवाद महिला सुरक्षा के साथ कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने महिला प्रशिक्षुओं को अपने कौशल को आगे बढ़ाने और भविष्य में दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में युवतियों के अनुभवों और भविष्य की योजनाओं के जरिए यह बात सामने आई कि प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।