₹2000 से ज्यादा UPI Payment पर लगेगा चार्ज? वायरल खबर ने बढ़ाई टेंशन, जानिए पूरा सच

UPI Payment: UPI Payment को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से चर्चा में है कि ₹2000 से ज्यादा की पेमेंट करने पर यूजर्स से चार्ज लिया जाएगा. इस खबर से कई लोग परेशान हैं और जानना चाहते हैं कि क्या वाकई UPI पेमेंट महंगी होने वाली है. फिलहाल किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है.
 

UPI Payment: UPI इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों के बीच इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है—क्या ₹2,000 से ज्यादा की UPI पेमेंट पर अब चार्ज देना पड़ेगा? केंद्र सरकार की हालिया अधिसूचना में ₹2,000 तक के UPI लेन-देन पर शुल्क नहीं लेने की बात कही गई है। इसी के बाद सोशल मीडिया पर बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने की अटकलें तेज हो गई हैं।

हालांकि, अभी ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई नया यूजर चार्ज लागू नहीं किया गया है। सरकार ने अगस्त 2026 में भी स्पष्ट किया था कि आम उपभोक्ताओं से UPI ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा और Person-to-Person (P2P) भुगतान मुफ्त रहेंगे।

₹2,000 की सीमा से क्यों बढ़ी लोगों की चिंता?

नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के UPI भुगतान को शुल्क-मुक्त रखने का स्पष्ट प्रावधान चर्चा में आया है। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या भविष्य में ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर शुल्क लगाया जा सकता है।

लेकिन मौजूदा अधिसूचना को इस अर्थ में नहीं देखा जा सकता कि ₹2,000 से ऊपर के हर UPI भुगतान पर अभी से शुल्क लगना शुरू हो गया है। किसी नए यूजर चार्ज की दर या उसे लागू करने की तारीख तय नहीं की गई है।

कांग्रेस ने लगाया 0.5% चार्ज लगाने का आरोप

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है।

पार्टी के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो ₹5,000 की UPI पेमेंट पर ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।

हालांकि, यह कांग्रेस का आरोप है, लागू किया गया सरकारी शुल्क नहीं।

भाजपा ने कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए इसे गलत सूचना बताया है।

सरकार ने UPI चार्ज को लेकर क्या कहा था?

केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में स्पष्ट किया था कि UPI से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, सभी P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले भुगतान मुफ्त रहेंगे।

सरकार ने यह भी कहा था कि यदि भविष्य में MDR यानी Merchant Discount Rate लागू किया जाता है, तो यह सभी लेन-देन पर नहीं बल्कि एक निश्चित सीमा से ऊपर सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसकी दर मामूली रखी जाएगी।

MDR क्या है और क्या इसका मतलब ग्राहक से चार्ज है?

यहां MDR को समझना जरूरी है। Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट की ओर से संबंधित बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि MDR लागू होने पर हर UPI ग्राहक से उसी अनुपात में सीधे पैसा काट लिया जाएगा।

सरकार की मार्च 2025 की योजना में भी ₹2,000 तक के छोटे-मर्चेंट UPI लेन-देन पर जीरो MDR और इंसेंटिव का प्रावधान था। वहीं ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर भी उस योजना के तहत MDR शून्य था।

क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI भेजने पर बैंक पैसे काटेगा?

फिलहाल नहीं।

अभी ऐसा कोई नया यूजर चार्ज लागू नहीं है जिसके तहत ₹2,000 से ज्यादा की UPI पेमेंट करने पर बैंक आपके खाते से अतिरिक्त राशि काटे।

खास तौर पर P2P ट्रांजैक्शन, यानी किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति द्वारा पैसे भेजने की स्थिति में, सरकार ने मुफ्त सेवा जारी रहने की बात कही है।

क्या भविष्य में UPI पर चार्ज आ सकता है?

भविष्य में कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की संभावना सरकार ने जरूर बताई है। लेकिन इसकी दर, दायरा और लागू होने की तारीख को लेकर अभी अंतिम व्यवस्था नहीं है। सरकार के मुताबिक, यदि MDR लाया जाता है तो यह सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन और एक निश्चित सीमा से ऊपर के भुगतान पर लागू होगा।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से ज्यादा UPI भुगतान पर 0.5% चार्ज लगना शुरू हो गया है।

आम UPI यूजर को अभी क्या जानना चाहिए?

  • ₹2,000 से अधिक UPI पेमेंट पर अभी कोई नया यूजर चार्ज लागू नहीं है।
  • P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान मुफ्त हैं।
  • 0.5% चार्ज की बात फिलहाल राजनीतिक आरोप/दावे के तौर पर सामने आई है, लागू नियम के रूप में नहीं।
  • भविष्य में कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की व्यवस्था बन सकती है।
  • MDR और ग्राहक से सीधे वसूले जाने वाले ट्रांजैक्शन चार्ज को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।

अभी UPI से ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर आम यूजर को कोई नया चार्ज नहीं देना पड़ रहा है। ₹2,000 की सीमा को लेकर उठी चिंता मुख्य रूप से भविष्य में संभावित MDR व्यवस्था और राजनीतिक दावों से जुड़ी है। इसलिए फिलहाल ₹5,000 या ₹10,000 की UPI पेमेंट पर क्रमशः ₹25 या ₹50 कटने की बात को लागू नियम मानना सही नहीं होगा।