योगी का बड़ा आरोप: 2017 से पहले पोषाहार सप्लाई में था शराब माफिया का दखल, तीन महीने तक नहीं पहुंचता था राशन

 

Up News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बच्चों के पोषाहार की आपूर्ति व्यवस्था में शराब माफिया से जुड़े लोगों का दखल था। कई बार तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था। बच्चों को टाट लेकर केंद्र आना पड़ता था और कई जगह पीने के पानी, शौचालय तथा गर्म भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में व्यवस्था की खामियों का खामियाजा आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को भुगतना पड़ता था। सरकार बनने के बाद पोषाहार वितरण व्यवस्था में बदलाव कर इसे तकनीक से जोड़ा गया और जवाबदेही तय की गई।

योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ कर रहे थे। पोषण माह 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी देखी, बच्चों का अन्नप्राशन कराया और अलग-अलग राज्यों से आई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद भी किया।

‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा से विकास का मॉडल

सीएम योगी ने रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए तुलसीदास की पंक्तियों ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना, नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना’ को सरकार की सोच से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था का लक्ष्य है जिसमें कोई व्यक्ति गरीब, कमजोर या दुखी न रहे और हर नागरिक स्वस्थ एवं सक्षम समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके। इसी सोच के तहत मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत किया जा रहा है।

साढ़े नौ साल में 70 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर हालत में थे। केंद्रों में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव था। सरकार ने इन केंद्रों को नए स्वरूप में विकसित करने पर जोर दिया।

पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया गया है। नए मॉडल केंद्रों में बच्चों के अनुकूल वातावरण के साथ शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बाउंड्रीवॉल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक केंद्र के निर्माण या रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं।

1.90 लाख केंद्रों से 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही सेवाएं

योगी ने बताया कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं। 897 बाल विकास परियोजनाओं के जरिए इनका संचालन किया जा रहा है। हर महीने करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं।

करीब 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील दिया जा रहा है, जबकि करीब 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती 1,000 दिन उसके विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ पर रहेगा फोकस

इस साल पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। सीएम ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं हो सकती। इसमें कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और स्थानीय लोगों की भी भागीदारी जरूरी है।

पोषण माह के दौरान संतुलित और विविध आहार, ताजा एवं गर्म भोजन, सामुदायिक भागीदारी, प्रारंभिक शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को एक ही तरह का भोजन देने के बजाय उसमें अलग-अलग सब्जियां और पौष्टिक सामग्री शामिल करनी चाहिए, ताकि भोजन स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी बने।

पोषाहार व्यवस्था में QR कोड और GPS की एंट्री

सरकार ने टेक-होम राशन यानी THR की व्यवस्था को भी तकनीक से जोड़ने का दावा किया है। प्रदेश में 204 THR प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिनसे 20 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं।

पोषाहार के परिवहन की GPS से निगरानी की जा रही है। पैकेट पर QR कोड लगाया गया है, जिससे उसके वितरण की डिजिटल ट्रेसिबिलिटी हो सके। सरकार का कहना है कि इससे पोषाहार की सप्लाई और गुणवत्ता दोनों पर निगरानी मजबूत हुई है।

आंगनवाड़ी बनी बच्चों की पहली पाठशाला

मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र अब केवल पोषण वितरण के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है।

बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल, गीत और गतिविधियों के जरिए अक्षर और अंकों का ज्ञान दिया जा रहा है। सीएम ने कानपुर के एक आंगनवाड़ी केंद्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां बच्चों को गीत के जरिए गिनती और शरीर के अंगों की पहचान सिखाई जा रही थी।

उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया गया निवेश देश के भविष्य को मजबूत करता है।

बाल वाटिकाओं के बच्चों को भी मिलेंगी दो यूनिफॉर्म

योगी ने कहा कि प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 1.60 करोड़ बच्चों को हर वर्ष दो-दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर देने की व्यवस्था है।

अब बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे बच्चों में स्कूल आने को लेकर उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

ऑपरेशन कायाकल्प से 1.36 लाख स्कूलों में सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत प्रदेश के 1.36 लाख विद्यालयों में भवन और मूलभूत सुविधाओं को बेहतर किया गया है। स्कूलों में पेयजल, अलग शौचालय और बेहतर शैक्षिक वातावरण पर ध्यान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले सुविधाओं के अभाव में खासकर बेटियों के स्कूल छोड़ने की समस्या सामने आती थी। अब बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है।

आंगनवाड़ी स्तर से शुरू होने वाली प्रारंभिक शिक्षा को निपुण भारत अभियान के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। पढ़ने-लिखने की बुनियादी क्षमता विकसित करने के प्रयासों को अब पांचवीं कक्षा तक विस्तार देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।

2100 इंटर कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं पर जोर

माध्यमिक शिक्षा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने बताया कि प्रोजेक्ट अलंकार के तहत करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। इनमें स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और बेहतर फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

इसके अलावा अटल टिंकरिंग लैब और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी व्यवस्थाओं के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 12 हजार, मिला बीमा कवर

मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 6 हजार रुपये किया गया है।

इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवारों के लिए 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया गया है। करीब 1.56 लाख कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन दिए जाने की जानकारी भी सीएम ने दी।

स्मार्टफोन के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों का रियल टाइम डेटा अपलोड किया जा रहा है, जिससे निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है।

मातृ वंदना योजना से माताओं को आर्थिक मदद

सीएम योगी ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी पोषण अभियान से जोड़ते हुए कहा कि गर्भवती और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ आर्थिक सुरक्षा भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चे की नींव तैयार होती है। यही बच्चा आगे चलकर स्वस्थ विद्यार्थी और फिर कुशल युवा बनता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यही युवा देश के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

‘गांव और गलियों से तैयार होगी विकसित भारत की नींव’

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल बड़े शहरों के विकास से हासिल नहीं किया जा सकता। इसकी बुनियाद गांवों, गलियों और समाज के शुरुआती स्तर पर तैयार करनी होगी।

उनके मुताबिक, आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक स्कूल राष्ट्र निर्माण के शुरुआती केंद्र हैं। पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, स्कूली शिक्षा और कौशल विकास को एक-दूसरे से जोड़कर ही सक्षम विद्यार्थी और कुशल युवा तैयार किए जा सकते हैं।

काशी के विकास का भी किया जिक्र

योगी ने वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि काशी ने अपनी पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास के साथ नया स्वरूप हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह काशी में परंपरा और आधुनिकता का समन्वय दिखाई देता है, उसी तरह पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में भी परंपरागत व्यवस्थाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है।

कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य समेत कई मंत्री, अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।