योगी बोले- स्वस्थ मां और बच्चे से बनेगा स्वस्थ युवा, गांव-गलियों से निकलेगा विकसित भारत; 70 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप
UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के बेहतर भविष्य की आधारशिला बताते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण केवल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि गांवों और गलियों से होकर होगा। आंगनबाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय इस बदलाव के शुरुआती केंद्र बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की असली ताकत उसका युवा होता है, लेकिन एक स्वस्थ और सक्षम युवा की नींव उसके बचपन में पड़ती है। बचपन की शुरुआत एक स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे से होती है। जब बच्चा स्वस्थ होगा तो स्वस्थ विद्यार्थी बनेगा और यही विद्यार्थी आगे चलकर शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत युवा के रूप में राष्ट्र को सही दिशा देने में योगदान देगा।
70 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदली तस्वीर का जिक्र करते हुए कहा कि 2017 से पहले बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर और अव्यवस्थित स्थिति में थे। पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप देने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य वित्त आयोग, केंद्रीय वित्त आयोग और बजट से मिलने वाले धन में आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आज इन केंद्रों में बाल वाटिकाएं संचालित हो रही हैं, जहां बच्चे खेल-खेल में अक्षर ज्ञान और अंक ज्ञान हासिल कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को अब केवल पोषण वितरण के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि बच्चों के शुरुआती विकास और शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
‘2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं थी व्यवस्था’
योगी आदित्यनाथ ने पिछली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले कई आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ-सफाई तक की उचित व्यवस्था नहीं थी। बच्चों के लिए पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। कई जगह बच्चे अपना टाट लेकर केंद्र पहुंचते थे।
उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली रेसिपी और पोषण सामग्री की गुणवत्ता का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद व्यवस्था की समीक्षा की गई और गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में गलती कहीं और होती थी, लेकिन उसका खामियाजा और नाराजगी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को झेलनी पड़ती थी। मानदेय को लेकर भी पहले समस्याएं रहती थीं।
‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ बनी इस साल की थीम
इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनबाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं हो सकती। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की भी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि अगर समाज के हर वर्ग को यह जिम्मेदारी समझ में आ जाए कि बच्चों का पोषण और शुरुआती शिक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, तो इसके परिणाम आने वाले वर्षों में दिखाई देंगे।
काशी को मिली नई पहचान, बदली तस्वीर का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने वाराणसी के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से काशी ने अपनी नई पहचान बनाई है। आज काशी नई आभा और नई काया के साथ देश-दुनिया को आकर्षित कर रही है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण, बाल वाटिका और खेल-खेल में सीखने की व्यवस्था इसके उदाहरण हैं।
स्वस्थ बचपन से तय होगा देश का भविष्य
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के रूप में देखना है। लेकिन यह लक्ष्य केवल दिल्ली में बैठकर पूरा नहीं होगा। इसकी शुरुआत गांवों और गलियों से करनी होगी।
उन्होंने कहा कि देश के भविष्य की नींव आज के बच्चों में तैयार हो रही है। इसलिए मां और बच्चे के स्वास्थ्य तथा पोषण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चा, स्वस्थ बच्चे से स्वस्थ विद्यार्थी और स्वस्थ विद्यार्थी से स्वस्थ युवा तैयार होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत युवा ही सकारात्मक सोच के साथ देश के भविष्य को सही दिशा देने में सक्षम होगा।
योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों को स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की नींव मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए पोषण अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।