हार के बाद कांग्रेस का बड़ा दांव: बिहार में 53 जिलाध्यक्ष बदले, नए चेहरों से संगठन में नई जान
इस नई सूची में जहां 10 पुराने जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका दिया गया है, वहीं 43 नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि अब वह नए नेतृत्व और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
पार्टी के “संगठन सृजन अभियान” के तहत यह बदलाव किया गया है। शीर्ष नेतृत्व ने जिला स्तर पर मिली फीडबैक, ऑब्जर्वर्स की रिपोर्ट और नेताओं से वन-टू-वन बातचीत के बाद ही इस सूची को अंतिम रूप दिया है।
कांग्रेस ने इस बार जिलाध्यक्षों के चयन में अनुभव से ज्यादा स्थानीय पकड़ और जनाधार को प्राथमिकता दी है। यही वजह है कि कई पुराने नेताओं के क्षेत्रों में बदलाव भी किया गया है, ताकि संगठन को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भी इस सूची में साफ दिखाई देती है। ब्राह्मण और यादव समुदाय को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं मुस्लिम, दलित और भूमिहार नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे कांग्रेस एक बार फिर अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाती दिख रही है।
राजधानी पटना में भी नए समीकरण उभरे हैं, जहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग नेतृत्व देकर पार्टी ने संतुलन बनाने की कोशिश की है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह नया संगठनात्मक प्रयोग कांग्रेस को बिहार की सियासत में फिर से मजबूती दिला पाता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि पार्टी ने 2025 की हार से सबक लेते हुए बदलाव की राह पकड़ ली है।