विधानमंडल सत्र में बड़ा दिन: स्पीकर बनेगा बीजेपी का—7 विधायकों ने शपथ नहीं ली, अनंत सिंह पर टिकी कोर्ट की नज़र

 

Bihar Vidhansabha Session Exclusive Report: बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जो पांच दिन तक चलेगा। पहले दिन सदन का माहौल पूरी तरह औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं से भरा रहा। कुल 235 नवनिर्वाचित विधायकों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ ली, फिर विजय कुमार सिन्हा और उसके बाद मंत्रियों तथा विधायकों को वरीयता क्रम के अनुसार बुलाया गया। सदन की कार्यवाही प्रोटेम स्पीकर ने संभाली और शपथ ग्रहण से पहले सदन को संबोधित भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उपस्थित रहे।

आज दूसरा दिन: स्पीकर के चुनाव पर टिकी नज़रें

सत्र के दूसरे दिन का मुख्य आकर्षण विधानसभा स्पीकर का चुनाव है। एनडीए की ओर से बीजेपी विधायक प्रेम कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है और हालात पूरी तरह यह संकेत दे रहे हैं कि उनका निर्विरोध स्पीकर चुना जाना तय है।

सात विधायकों ने नहीं ली शपथ

पहले दिन सात विधायक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए। इनमें शामिल हैं—
    •    मदन सहनी
    •    जीवेश मिश्रा
    •    विनय बिहारी
    •    अनंत सिंह
    •    केदारनाथ सिंह
    •    डॉ. सुनील कुमार
    •    अमरेंद्र पांडेय

अनंत सिंह जेल में बंद हैं, जबकि बाकी छह विधायक पटना में अनुपस्थित होने के कारण शपथ लेने नहीं पहुंचे।

शपथ न लेने का क्या मतलब?

संविधान के आर्टिकल 188 और 193 के अनुसार—
    •    शपथ के बिना कोई विधायक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकता।
    •    शपथ से पहले उनको वेतन, भत्ता या सदस्यता लाभ नहीं मिलता।
    •    अगर कोई बिना शपथ लिए सदन में बैठ जाता है तो 5,000 रुपये प्रति बैठक जुर्माना लग सकता है।

जेल में बंद अनंत सिंह शपथ कैसे लेंगे?

जेडीयू के नवनिर्वाचित विधायक अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्या मामले में 1 नवंबर से जेल में बंद हैं। चुनाव जीतने के बावजूद शपथ के लिए उन्हें कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। उनके वकीलों ने पटना हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत या पैरोल की मांग की है, ताकि 1 से 5 दिसंबर के बीच शपथ ग्रहण किया जा सके।

कोर्ट ने अभी कोई आदेश नहीं दिया है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि शपथ के लिए सीमित अवधि का पैरोल मिल सकता है।

2020 में भी कोर्ट ने दी थी राहत

अनंत सिंह इससे पहले भी 2020 के विधानसभा चुनाव में जेल से जीतकर आए थे। उस समय भी उन्होंने पैरोल की अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने मंजूर किया और उन्हें शपथ लेने की अनुमति दी गई थी। यह मिसाल उनके पक्ष में मजबूत तर्क बन सकती है।