Bihar elections 2025: दिल्ली में कांग्रेस की हाई-लेवल बैठक आज, सीट बंटवारे पर होगी निर्णायक चर्चा

 

New Delhi/Bihar: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इसके साथ ही सियासी परदे पर गतिविधियां भी तेज़ हो गई हैं। तमाम दलों में टिकट के दावेदारों की हलचल के बीच अब नजरें टिकी हैं दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की एक निर्णायक बैठक पर, जहां पार्टी नेतृत्व बिहार में अपनी चुनावी चाल तय करने जा रहा है।

दिल्ली में जुटेंगे कांग्रेस के तमाम बड़े नेता

आज यानी 14 जुलाई को कांग्रेस मुख्यालय में एक विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, प्रदेश प्रभारी कृष्ण अल्लावरु और विधायक दल के नेता शकील अहमद खान समेत तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार, बैठक केवल “कागजी समीक्षा” तक सीमित नहीं होगी, बल्कि सीट बंटवारे, चुनावी नैरेटिव और महागठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका जैसे जटिल मुद्दों पर दो टूक निर्णय लिए जाने की संभावना है।

पटना में हुई थी पूर्व बैठक

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब 12 जुलाई को पटना में महागठबंधन के घटक दलों की एक अहम बैठक हो चुकी है। उसमें जहां सीट बंटवारे पर शुरुआती मंथन हुआ, वहीं अब कांग्रेस नेतृत्व बिहार के अपने नेताओं से सीधे फीडबैक लेकर सीटों का फॉर्मूला फाइनल करने की दिशा में बढ़ेगा।

'भाजपा-एनडीए को कैसे रोका जाए', एजेंडे में शामिल

बैठक का सबसे अहम पहलू यह है कि कांग्रेस अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भाजपा और एनडीए को कड़ी टक्कर देने वाली रणनीति तैयार करना चाहती है।

बैठक में इन बिंदुओं पर विशेष चर्चा संभावित है:

  • किन सीटों पर कांग्रेस का परंपरागत प्रभाव है और उन्हें कैसे साधा जाए
  • गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी कितनी हो
  • किस तरह से एक संयुक्त प्रचार अभियान चलाया जाए
  • जनता के बीच “वैकल्पिक सरकार” के रूप में महागठबंधन की छवि कैसे गढ़ी जाए

सभी की सहमति से आगे बढ़ेगी बात

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस चाहती है कि सीट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर पहले एकमत बने, फिर महागठबंधन के अन्य दलों जैसे- राजद, जदयू, वामपंथी दलों से अंतिम बातचीत की जाए। यह तरीका विवाद से बचने और रणनीति को स्पष्ट रूप देने में मदद करेगा।

क्या कांग्रेस ले पाएगी 'किंगमेकर' की भूमिका?

पिछले चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस इस बार ‘डिसाइडिंग फैक्टर’ बनने की कोशिश में है। पार्टी के नेता मानते हैं कि अगर अभी से ज़मीनी तैयारी, टिकट बंटवारा और प्रचार की रणनीति पर फोकस किया जाए तो कांग्रेस न केवल महागठबंधन में सशक्त बन सकती है, बल्कि कुछ सीटों पर निर्णायक लड़ाई भी लड़ सकती है।

दिल्ली की यह बैठक महज एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि बिहार में कांग्रेस की आगामी सियासी दिशा का ब्लूप्रिंट साबित हो सकती है। पार्टी कैसे अपनी रणनीति को अमल में लाती है, यह आने वाले हफ्तों में बिहार की चुनावी तस्वीर को काफी हद तक प्रभावित करेगा।