बिहार चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर एनडीए में फंसा पेंच, चिराग पासवान ने रखी कड़ी शर्त, बोले- 30 सीटें नहीं मिलीं तो करेंगे बड़ा फैसला

 

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने दल के लिए बड़ी शर्तें रखी हैं, जिससे भाजपा और जदयू के बीच सहमति बनना मुश्किल दिख रहा है।

गुरुवार को चिराग पासवान ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए सभी सांसदों ने चिराग पासवान को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सौंप दिया।

एलजेपी (रा) की मांग-कम से कम 30 सीटें चाहिए

पार्टी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 5 सांसद हैं। ऐसे में नेताओं का मानना है कि कम से कम 30 विधानसभा सीटें चिराग पासवान की पार्टी को मिलनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पार्टी “अलग रास्ता” अपनाने पर विचार कर सकती है।

सूत्र बताते हैं कि लोजपा (रा) ने अपनी शर्तें भाजपा को पहले ही लिखित रूप में भेज दी हैं। अब बॉल भाजपा और जदयू के पाले में है। एनडीए के भीतर यह सबसे बड़ा पेंच बना हुआ है क्योंकि जदयू अपने कोटे में किसी भी प्रकार की कटौती के खिलाफ है।

नित्यानंद राय ने की मुलाकात, चिराग को मनाने की कोशिश

एनडीए के अंदर बढ़ते तनाव के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय गुरुवार को चिराग पासवान के घर पहुंचे। हालांकि उस वक्त चिराग घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उन्होंने उनकी मां रीना पासवान से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने चिराग को मनाने की जिम्मेदारी नित्यानंद राय को सौंपी है।

पत्रकारों से बातचीत में नित्यानंद राय ने कहा, “चिराग पासवान नाराज नहीं हैं। मैं उनके अभिभावकों का आशीर्वाद लेने आया था।” भले ही उन्होंने नाराजगी से इंकार किया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे “डैमेज कंट्रोल मीटिंग” के रूप में देखा जा रहा है।

2020 में 137 सीटों पर लड़ी थी लोजपा

अगर 2020 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो चिराग पासवान की लोजपा ने तब 137 सीटों पर अकेले दम पर उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि सिर्फ एक सीट पर जीत मिली, और वह विधायक भी बाद में जदयू में शामिल हो गया।

उस वक्त चिराग पासवान ने जदयू की हर सीट पर उम्मीदवार उतारकर नीतीश कुमार की पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया था, जिसके कारण जदयू की सीटें घटकर 43 पर सिमट गईं।

अब 2025 के चुनाव में फिर से वही समीकरण बनते नजर आ रहे हैं- चिराग की पार्टी एक बार फिर “किंगमेकर या डैमेजमेकर” की भूमिका में दिखाई दे रही है।

एनडीए में खिंचतान बरकरार

भाजपा जहां किसी तरह एनडीए की एकता बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं जदयू और लोजपा (रा) के बीच सीट शेयरिंग पर तनाव चरम पर है। अगर समझौता जल्द नहीं हुआ, तो बिहार की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।