Bihar news: सरकारी जमीन के दाखिल-खारिज में देरी पर सरकार सख्त, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

 

Bihar news: बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी भूमि का समय पर दाखिल-खारिज होना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ सरकारी जमीन को निजी नाम पर दर्ज होने से रोका जा सकेगा, बल्कि राज्य में पारदर्शी और मजबूत राजस्व व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार सख्त कदम उठा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि के अभिलेख सही और अद्यतन रहना राज्य के औद्योगिक विकास से सीधे तौर पर जुड़ा है। समय से दाखिल-खारिज होने पर औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और राज्य का विकास और मजबूत होगा। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी भूमि से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए।

इस मामले में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर सरकारी भूमि से जुड़े दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया है। पत्र में बताया गया है कि विभिन्न प्रक्रियाओं से प्राप्त, अर्जित और अधिसूचित सरकारी भूमि की जमाबंदी बनाने के लिए विभाग पहले ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। इसके लिए “सरकारी भूमि दाखिल-खारिज पोर्टल” भी तैयार किया गया है।

इसके बावजूद राज्य स्तर पर सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज मामलों का औसत निष्पादन मात्र 22.86 प्रतिशत पाया गया है, जिसे सचिव ने गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई अंचलों में अब तक एक भी मामला निष्पादित नहीं किया गया है, जो अंचल स्तर पर उदासीनता को दर्शाता है।

सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि का समयबद्ध दाखिल-खारिज सरकारी हितों की सुरक्षा, राजस्व संरक्षण और भूमि अभिलेखों की शुद्धता के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबित मामलों का जिलावार और अंचलवार विवरण पत्र के साथ भेजा गया है, ताकि अधिकारी वास्तविक स्थिति को समझ सकें।

सभी जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दें और लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटारा सुनिश्चित कराएं। यह निर्देश अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचल अधिकारियों को भी भेजा गया है, ताकि विभागीय स्तर पर समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई हो सके।