Bihar political update: दही-चूड़ा की थाली पर सियासत की सुलह? तेज प्रताप ने मामा साधु यादव को दिया न्योता, बढ़ी राजनीतिक हलचल

 

Bihar political update: जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव 14 जनवरी को पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन करने जा रहे हैं। मकर संक्रांति के मौके पर होने वाले इस भोज को लेकर तेज प्रताप खुद नेताओं और करीबियों से मिलकर आमंत्रण दे रहे हैं। इसी कड़ी में उनकी एक मुलाकात ने सियासी गलियारों में खास चर्चा छेड़ दी है।

तेज प्रताप यादव अपने मामा और पूर्व सांसद साधु यादव के आवास पहुंचे और उन्हें दही-चूड़ा भोज में शामिल होने का न्योता दिया। दोनों की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। यह भोज पटना के 26 एम स्ट्रैंड रोड स्थित तेज प्रताप के सरकारी आवास पर आयोजित किया जाएगा।

परंपरा भी, राजनीति भी

तेज प्रताप यादव दही-चूड़ा भोज के जरिए अपने पिता लालू यादव की पुरानी राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार खास बात यह है कि उन्होंने पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों के नेताओं को आमंत्रित किया है। यहां तक कि एनडीए सरकार के मंत्रियों को भी न्योता दिया गया है, जिससे भोज के राजनीतिक मायने और गहरे हो गए हैं।

साधु यादव को न्योता, क्यों है खास?

मामा साधु यादव को आमंत्रण देना इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि बीते वर्षों में साधु यादव और लालू परिवार के रिश्ते काफी तल्ख रहे हैं। तेज प्रताप यादव से जुड़े कई विवादों में साधु यादव खुलकर उनके खिलाफ बयान देते रहे हैं। अनुष्का प्रकरण के दौरान भी उन्होंने तेज प्रताप पर गंभीर आरोप लगाए थे और लालू यादव द्वारा तेज प्रताप को पार्टी व परिवार से बाहर किए जाने के फैसले का समर्थन किया था।

इसके बावजूद तेज प्रताप यादव का खुद चलकर मामा को आमंत्रण देना राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है। इसे कहीं पारिवारिक पहल माना जा रहा है तो कहीं इसे सियासी समीकरण साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

दही-चूड़ा के बहाने बढ़ी सियासी गर्मी

गौरतलब है कि साधु यादव लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई हैं, लेकिन लंबे समय से उनका लालू परिवार से राजनीतिक और व्यक्तिगत टकराव रहा है। ऐसे में तेज प्रताप की यह पहल बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गई है।

अब सबकी नजर 14 जनवरी के दही-चूड़ा भोज पर टिकी है, जहां यह साफ हो पाएगा कि यह आयोजन सिर्फ परंपरा निभाने का मंच है या फिर इसके जरिए राजनीति में कोई नया संदेश देने की तैयारी है।