नाव दुर्घटना पीड़ितों को 10-10 लाख मुआवजा मिले, नावों की सुरक्षा और बांध-पुल निर्माण की हो उच्चस्तरीय जांच: पप्पू यादव
पटना: पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने आज पटना में महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) से मुलाकात कर उन्हें विभिन्न जनसमस्याओं से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। उन्होंने राघोपुर में बाढ़ और नाव दुर्घटनाओं में हुई मौतों पर चिंता जताते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। इसके साथ ही नावों की सुरक्षा, बांध और पुल निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच, युवाओं की नियुक्ति, शिक्षा व्यवस्था, स्थानीय निवास नीति और महिला सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर कार्रवाई का आग्रह किया।
पप्पू यादव ने कहा कि भागलपुर में नाव दुर्घटना के अलावा छपरा के मकेर, परसा, अमनौर और पानापुर जैसे इलाकों में बाढ़ से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने छपरा में करीब 40 से 50 और बेतिया में करीब 18 लोगों की मौत की जानकारी का उल्लेख किया। उनके अनुसार, कई लोगों की मौत नाव पलटने, डूबने और सांप काटने से हुई है, लेकिन पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने हाल में नाव दुर्घटना में 14 बच्चों की मौत को बेहद दुखद बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
सांसद ने कहा कि नावों में लाइफ जैकेट और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। रात में असुरक्षित तरीके से नावों का परिचालन नहीं होना चाहिए। उन्होंने दीपावली और छठ तक जल परिवहन की व्यवस्था बनाए रखने, कम से कम 40 स्टीमर चलाने तथा भागलपुर के विक्रमशिला गंगा तटवर्ती क्षेत्र में बड़ी यात्री नावों और ट्रैक्टरों की व्यवस्था करने की मांग की।
उन्होंने गंडक नदी के तटबंधों के टूटने और बाढ़ नियंत्रण कार्यों में कथित लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। बूढ़ी गंडक में पानी बढ़ने और नारायणी नदी से मुजफ्फरपुर तथा आसपास के इलाकों में संभावित नुकसान को लेकर भी चिंता जताई। पप्पू यादव ने कहा कि बांध टूटने के मामलों में केवल इंजीनियरों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। टूटे पुलों में इस्तेमाल सरिया की गुणवत्ता, मेसर्स श्याम स्टील की सरिया और निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों के पालन की जांच कराने की भी मांग की। उन्होंने सरकारी निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल टीएमटी सरिया, विभागों की अनुमोदित मेक सूची और बिलो रेट पर आवंटित निविदाओं की भी जांच कराने को कहा।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सांसद ने बिहार के नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने और दर्शनशास्त्र विभाग की स्थापना की मांग की। उन्होंने बेल्ट्रॉन डाटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्ति अधिसूचना संख्या 678/2024 के तहत शेष 4808 योग्य अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची जारी करने के लिए 20 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र पर अनुस्मारक दिया। उन्होंने 1,731 पूर्व संचालित कुशल युवा कार्यक्रम (केवाईपी) केंद्रों को फिर से शुरू करने और ‘केवाईपी डिजिटल मित्र’ योजना के वर्तमान प्रारूप पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई।
पप्पू यादव ने टीआरई-3 की लंबित नियुक्तियों और अनुपूरक परिणाम, टीआरई-4 की अधिसूचना में देरी, 70वीं बीपीएससी परीक्षा की कथित अनियमितताओं और गर्दनीबाग छात्र सत्याग्रह के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक नियोजन में बनी अनिश्चितता दूर करने तथा विद्यार्थियों की मांगों पर संवैधानिक हस्तक्षेप का आग्रह किया। बिहार की सरकारी नियुक्तियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रभावी डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग को लेकर 21 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र पर भी अनुस्मारक दिया।
ज्ञापन में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के अनुरक्षकों के मानदेय भुगतान में आ रही तकनीकी बाधाओं, नकद भुगतान व्यवस्था में भ्रष्टाचार और राजस्व नुकसान की आशंका तथा महिला सुरक्षा से जुड़े दो गंभीर मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का विषय भी शामिल रहा। इन मामलों में क्रमशः 20 अगस्त और 22 सितंबर 2026 को भेजे गए पत्रों पर अनुस्मारक दिया गया।
सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और मेटा पर फर्जी समाचार, भ्रामक सूचना, डीपफेक, फर्जी खातों और आपत्तिजनक सामग्री के दुरुपयोग पर कठोर नियामक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं को रोजगार के उचित अवसर मिलें और निर्माण, शिक्षा, सुरक्षा तथा जनकल्याण से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से इन मुद्दों पर बिहार सरकार और केंद्र सरकार से आवश्यक कार्रवाई कराने का आग्रह किया।