राज्यसभा चुनाव से पहले बिहार में ‘जातीय गणित’ गरमाया, RJD के भूमिहार उम्मीदवार ने बढ़ाई NDA की टेंशन
इस बार चुनाव में जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवार के तौर पर A D सिंह को मैदान में उतारा है, जो भूमिहार समुदाय से आते हैं। यही वजह है कि सत्तारूढ़ गठबंधन में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कहीं स्वजातीय समीकरण के कारण कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग न कर दें।
क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए रणनीति
सूत्रों के मुताबिक संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस ने अंदरूनी रणनीति तैयार की है। बताया जा रहा है कि जनता दल(यूनाइटेड) के भूमिहार विधायकों से कहा गया है कि वे नीतीश कुमार को वोट दें, जबकि भारतीय जनता पार्टी के भूमिहार विधायक नितिन नवीन के पक्ष में मतदान करें।
माना जा रहा है कि इस रणनीति का मकसद गठबंधन के भीतर किसी भी तरह की टूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को कम करना है।
उम्मीदवारों का सामाजिक समीकरण
इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवारों का सामाजिक संतुलन भी चर्चा में है। जदयू की ओर से रामनाथ ठाकुर नाई समुदाय से आते हैं, जबकि भाजपा के उम्मीदवार शिवेश कुमार दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा समुदाय से जुड़े नेता हैं।
इसी बीच राजद के भूमिहार उम्मीदवार के मैदान में उतरने से चुनाव में जातीय समीकरण की चर्चा और तेज हो गई है।
विधानसभा का संख्या बल
बिहार लेजिस्लेटिव असेंबली में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 41 वोट जरूरी होते हैं। संख्या बल के लिहाज से एनडीए के पास करीब 202 विधायक हैं, जिससे चार सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि पाँचवीं सीट के लिए एनडीए के पास फिलहाल 38 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है, यानी उसे जीत के लिए 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।
वहीं विपक्षी खेमे में RJD, Congress और वाम दलों के साथ-साथ All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen और Bahujan Samaj Party के विधायक भी अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं।
ऐसे में बिहार की राजनीति में पाँचवीं राज्यसभा सीट को लेकर सियासी गणित, जोड़-तोड़ और रणनीति का खेल और भी दिलचस्प हो गया है। अब सबकी नजर वोटिंग के नतीजों पर टिकी है।